पानीपत। देवों के देव महादेव की पूजा और उपासना का पर्व महाशिवरात्रि मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं पर भगवान शिव व मां पार्वती की विशेष कृपा रहती है। अबकी महाशिवरात्रि पर पंच ग्रहों के योग का महासंयोग और दो महाशुभ योग बन रहे हैं। उधर, भक्तों में उत्साह के साथ शिव मंदिरों में भी तैयारी जोरों पर रही। मंगलवार को सुबह से ही शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि तो हर महीने में आती है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली इस महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव और पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है। इसलिए शिव भक्त पूरी रात जागते हैं और अपने आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं।
श्री अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर अबकी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महाशिवरात्रि पर पंच ग्रहों के योग का महासंयोग और दो महाशुभ योग बन रहे हैं। मंगलवार को मकर राशि में शुक्र, मंगल, बुध, चंद्र, शनि के संयोग के साथ ही केदार योग भी बनेगा। जो पूजा उपासना के लिए विशेष कल्याणकारी है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि एक मार्च को सुबह 3:16 बजे से 2 मार्च रात्रि एक बजे तक रहेगी। शिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र में परिधि नामक योग बन रहा है और इस योग के बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। वहीं परिध योग के बाद से शिव योग शुरू हो जाएगा जिसे शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि शिव पूजन का संयोग 28 फरवरी सोमवार को प्रदोष से शुरू हो चुका है।
दूसरी ओर श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ लेकर आ जा रहे हैं। कोरोना की वजह से पिछली बार कांवड़ यात्रा पर पाबंदी रही थी लेकिन अबकी ऐसा नहीं है। इसीलिए महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। शहर के 20 से अधिक मंदिरों समेत जिले के सैकड़ों मंदिरों में श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने पहुंचेंगे। पुष्प, बेल पत्र, धतूरा आदि भी अर्पित करेंगे। कई जगहों पर रुद्राभिषेक का आयोजन भी किया गया है। वहीं श्रद्धालु घरों में भी महामृत्युंजय महामंत्र का जाप करेंगे।
इन मंदिरों में रहती है भीड़
शहर के मंदिरों में चुलकाना धाम, श्री देवी मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, गीता मंदिर, काशीगिरी मंदिर, प्रेम मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, श्री राधा-रमण मंदिर, श्री रघुनाथ धाम मंदिर समेत शहर व गावों के मंदिरों में लोगों की लंबी लाइन लगती है।
पूजा के मुहूर्त
पहले पहर की पूजा- 1 मार्च की शाम को 06 बजकर 21 मिनट रात के 9 बजकर 27 मिनट तक।
दूसरे पहर की पूजा- 1 मार्च की रात्रि 9 बजकर 27 मिनट से रात्रि के 12 बजकर 33 मिनट तक।
तीसरे पहर की पूजा-1 मार्च की रात 12 बजकर 33 मिनट से सुबह 3 बजकर 39 मिनट तक।
चौथे पहर की पूजा- 2 मार्च की सुबह 3 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक।
पारण का समय- 2 मार्च सुबह 6 बजकर 45 मिनट के बाद पारण का समय है।
राशि के अनुसार करें पूजा
महाशिवरात्रि को मेष राशि वालों को बेलपत्र, वृष वालों को दूध मिश्रित जल, मिथुन वालों को दही मिश्रित जल, कर्क राशि वालों को चंदन का इत्र, सिंह राशि वालों को घी का दीपक, कन्या राशि वालों को काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करना चाहिए।
तुला राशि वालों को जल में सफेद चंदन, वृश्चिक राशि वालों को जल और बेलपत्र, धनु राशि वालों को अबीर या गुलाल, मकर राशि वालों को भांग और धतूरा, कुंभ राशि को पुष्प, मीन राशि वालों को गन्ने का रस और केसर से अभिषेक करना चाहिए।