जाट आरक्षण आंदोलन के चलते पिछले तीन दिनों में औद्योगिक नगरी पानीपत को करोड़ों का फटका लगा है। पिछले तीन दिनों में शहर से एक रुपये का भी एक्सपोर्ट नहीं हो पाया है।
टैक्सटाइल के माल से भरे सैकड़ों कंटेनर जाम में फंसे हुए हैं और काफी माल कारखानों में पड़ा है। रिफाइनरी से तेल व दूसरे उत्पादों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। कई जिलों में पेट्रोल व डीजल की किल्लत बढ़ गई। वहीं करीब तीस प्रतिशत फैक्टरी बंद पड़ी हैं।
जाट आरक्षण आंदोलन तीन दिन के बाद भी शांत नहीं हो पाया है। प्रदेश के कई जिलों में हालात चिंताजनक बने हुए है। आर्मी, पैरामिल्ट्री व पुलिस प्रदेश में हालात पर काबू पाने के लिए तमाम कोशिश कर रही हैं।
सोमवार को प्रदेश में कई जगह पर आर्मी और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हो गए। इसका सबसे बड़ा असर पानीपत टैक्सटाइल और रिफाइनरी पर पड़ा है।
पानीपत से देश-विदेश में हर रोज टैक्सटाइल माल के 50 कंटेनर जाते हैं। इसमें 20 कंटेनर रेल के माध्यम से मुंबई पहुंचते हैं। आंदोलन के कारण टैक्सटाइल से भरे कंटेनर रास्ते में ही रुके हुए हैं। निर्यात होने के तैयार पड़ा माल कारखानों में पड़ा है।
रिफाइनरी पर आंदोलन का असर
पानीपत रिफाइनरी साउथ एशिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। पानीपत रिफाइनरी से प्रतिदिन हिमाचल, पश्चिमी यूपी, दिल्ली और हरियाणा में सभी श्रेणियों का डीजल, पेट्रोल, ग्रीस, कोलतार, नेफ्था व प्लास्टिक दाना सप्लाई होता है। रिफाइनरी से हर रोज औसतन 750 टैंकर तेल और डीजल के दूसरे राज्यों में सप्लाई होते है।
आंदोलन के चलते प्रदेश और दूसरे राज्यों में डीजल, पेट्रोल, ग्रीस, कोलतार, नेफ्था व प्लास्टिक दाना की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में रिफाइनरी और टैक्सटाइल उद्योगों पर करोड़ो रुपये का फटका लगा है।
पानीपत इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर पहुंची
औद्योगिक नगरी पानीपत का एक्सपोर्ट व डोमेस्टिक मार्केट पूरी तरह से बंद हो गया है। यहीं नहीं लेबर न मिलने पर करीब तीस प्रतिशत फैक्टरियां बंद पड़ी हैं।
लेबर डर के मारे फैक्टरी तक नहीं जा रहे। हरियाणा चैंबर ऑर्फ कॉमर्स के जिला सचिव विनोद खंडेलवाल ने बताया कि पानीपत उद्योगों से हर रोज करीब 450 करोड़ रुपये का टर्न ओवर होता है। आरक्षण के चलते अब करीब 12 सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।