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Panipat News: राताेंरात सबकुछ छोड़ आए... खड्डी में दरी व खेस बनाकर बेचे, अब फैक्टरी के मालिक

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अश्वनी शर्मा।
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विभाजन की विभीषिका
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- मॉडल टाउन निवासी नीतिसेन भाटिया बोले- उनकी आंखों के सामने नौ परिजनों को जिंदा जलाया था

माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। विभाजन के समय पाकिस्तान के कई शहरों में बसे लोगों को अपना सबकुछ छोड़ रातोंरात भारत आना पड़ा था। उनका काम धंधा और कमाया पैसा सब छूट गया था। उस समय पानीपत में तहसील कैंप और कच्चा कैंप दो कैंप बनाए गए थे। इनके नाम आज भी तहसील कैंप और कच्चा कैंप के नाम से प्रचलित हैं। लोगों ने उस समय अपने पुस्तैनी काम हथकरघा को अपनाया और मजदूरी तक की। खड्डी में दरी और खेस बनाकर आसपास के गांवों में फेरी लगाकर बेचते थे। धीरे-धीरे काम ने गति पकड़ी और आज पानीपत की औद्याेगिक नगरी विश्व में पहचान बना चुकी। अकेले पानीपत से करीब 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाता है। इसके साथ ही करीब 80 हजार करोड़ रुपये का घरेलू बाजार है।
मॉडल टाउन निवासी नीतिसेन भाटिया ने बताया कि उनका पाकिस्तान में अपना अच्छा काम था। वे उस समय छोटी उम्र के थे। विभाजन के समय एक साथ घर छोड़ने की बात हुई। परिवार के लोग उनको साथ लेकर चले पड़े। पाकिस्तान में उनकी आंखों के सामने उनके परिवार के नौ सदस्यों को जिंदा जला दिया था। उनको चारों तरफ मौत नजर आ रही थी। उस मंजर को देखकर हर किसी की रूह कांप रही थी। आंखों से आंसू नहीं थम पा रहे थे। उन्होंने यहां आकर पहले मजदूरी की और फिर खेती संभाली। अब अपना बिजनेस संभाला और दवा की फैक्टरी लगाई। आज उनकी दवा की फैक्टरी हैं। उनके बेटे नवीन भाटिया ने बताया कि पानीपत में आकर लोगों ने अपना सबकुछ बसाया।
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एक ही चादर पर सोए थे परिवार के नौ सदस्य : अश्वनी
सेक्टर-25 निवासी अश्वनी शर्मा ने बताया कि उनके दादा हकीम पंडित सावन राम पाकिस्तान के मीयावाली जिला के गांव हैदराबाद में रहते थे। उन्होंने 1916 में लाहौर मेडिकल कॉलेज से हकीम की डिग्री प्राप्त की। वे जानेमन हकीम थे और आसपास के शहरों के भी लोग इलाज कराने आते थे। उनके पिता तिलकराज शर्मा विभाजन के समय एक वर्ष के थे। वे बताते हैं कि विभाजन के समय सब कुछ छोड़कर आ गए थे। यहां परिवार के नौ सदस्यों के पास एक चादर थी। वे उसी में गुजारा करते थे। उन्होंने यहां आकर हकीम शुरू की और अपना हथकरघा का काम शुरू किया। उनकी आज दो फैक्टरी हैं।

अश्वनी शर्मा।

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