जगाधरी-व्यासपुर स्टेट हाईवे पर प्राइवेट बस की खिड़की पर खड़े होकर सफर करते विद्यार्थी। संवाद
यमुनानगर। ग्रामीण रूटों पर सुबह के समय बस की कमी से विद्यार्थी और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सुबह के समय स्कूल, काॅलेज के लिए शहर आने वाले विद्यार्थियों को हो रही है। विद्यार्थियों की ओर से बसों पर लटक कर सफर करना उनकी मजबूरी बनकर रह गई है। बसों की कमी के चलते उन्हें कॉलेज से वापस घर आने के लिए मजबूरन बसों पर लटक कर आना पड़ता है।
छात्र पंकज, अर्पित, अंकित, विनोद ने बताया कि कई गांवों में रोडवेज की बस सर्विस न होने से उन्हें बसों में लटककर और लिफ्ट लेकर आना जाना पड़ रहा है। वह पहले कई किलोमीटर तक किसी अड्डे पर पहुंचते हैं ताकि वहां से बस मिल सके। वहां भी घंटों खड़े होने के बाद ही बस मिलती है। सरकारी बसें अड्डों पर नहीं रूकती। मजबूरन किराया देकर विद्यार्थियों को प्राइवेट बसों में सफर करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने मांग है कि इन मार्गों पर बसों के टाइम बढ़ाए जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े ओर किसी प्रकार की अनहोनी की आशंका रहे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले प्रतापनगर में रोडवेज बस की चपेट में आने से एक छात्रा की मौत हो गई थी जबकि चार गंभीर रूप से घायल हुई थी। छात्रों का कहना है कि अच्छे स्कूल, कॉलेज यमुनानगर शहर में ही हैं। इसलिए बेहतर शिक्षा के लिए ग्रामीण इलाकों से बच्चे शहर का रुख करते हैं। लेकिन बसों की संख्या कम होने से छात्र या तो स्कूल और कॉलेज नहीं जा पाते।
नई बसें रोडवेज डिपो में आ रही हैं। जल्द ही बसों की कमी पूरी हो जाएगी। जिस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाने की मांग आती है वहां पर बस चला दी जाती है।
- संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो।