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फैक्टरियों में गंभीरता से लागू नहीं हो रहा श्रम कानून, श्रमिकों को नहीं मिल पाता उनका अधिकार

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फैक्टरियों में श्रमिकों की मौत के बाद उन्हें इसलिए मुआवजा या उनका अधिकार नहीं मिल पाता, क्योंकि फैक्टरियों में श्रम कानून गंभीरता से लागू नहीं है। श्रम विभाग के पास फैक्टरियों की आधी अधूरी जानकारी है। जो रिपोर्ट फैक्टरी के मालिक श्रम विभाग या उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को देते हैं, वे ही जानकारी सरकार तक पहुंच पाती है। जिम्मेदार अधिकारी फैक्टरियों का निरीक्षण नहीं करते। विभाग के अनुसार जिले में आज तक फैक्टरियों में महज 54 श्रमिकों की ही मौत हुई है, जबकि हकीकत में पिछले तीन साल में ही लगभग 40 श्रमिकों की काम के दौरान मौत हुई है। एक आरटीआई से मिली जानकारी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
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उद्योगपतियों के अनुसार शहर में 18 हजार से अधिक फैक्टरियां हैं। श्रम विभाग के रिकॉर्ड में मात्र 490 फैक्टरियां ही नक्शे से बनी हैं। बाकी फैक्टरियों का पंजीकरण नहीं है। श्रम विभाग के अनुसार जिले के कारखानों में काम करने वाले महज 116797 श्रमिकों का ही रिकॉर्ड है। जबकि पानीपत में साढ़े तीन लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। श्रम विभाग के पास श्रमिकों का रिकार्ड नहीं है।
वकील वैभव देशवाल की ओर से आरटीआई में मांगी जानकारी में श्रम विभाग ने कहा कि उनके पास श्रमिकों के साथ हुए हादसे के बाद मिले मुआवजे की जानकारी नहीं है। विभाग के प्रथम कार्यालय में 30749 और दूसरे कार्यालय में 86048 श्रमिक रजिस्टर्ड हैं।
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बिना पंजीकरण के चल रहीं फैक्टरियों पर कार्रवाई हो : वैभव
बिना पंजीकरण के चल रहीं फैक्टरियों में कोई हादसा होने के बाद श्रमिकों का उनका अधिकार नहीं मिल पाता है। आए दिन फैक्टरियों में हादसे होते हैं। उनकी सरकार से मांग है कि इसके जिम्मेेदार अधिकारियों व फैक्टरी मालिकों पर कार्रवाई हो।
- वैभव देशवाल, वकील एवं समाजसेवी
पानीपत में 600 डाइंग यूनिट और 7 हजार टेक्सटाइल फैक्टरी
सेक्टर-29 पार्ट टू में 500 और जिले के दूसरे हिस्सों में 100 डाइंग यूनिट हैं। डाइंग एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा के अनुसार इन डाइंग यूनिट में लगभग 45 हजार श्रमिक काम करते हैं। शहर के सेक्टर 29 पार्ट वन, कुटानी रोड, बरसत रोड, काबड़ी रोड, समालखा, बापौली, नूरवाला, गोहाना रोड पर 7 हजार टेक्सटाइल फैक्टरी हैं। इनमें लगभग 2 लाख श्रमिक काम करते हैं।
एक भी ब्लीच हाउस के पास नहीं है एनओसी
जिले में अवैध रूप से 380 ब्लीच हाउस चल रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार एक भी ब्लीच हाउस के पास एनओसी नहीं है। सभी ब्लीच हाउस गैरकानूनी ढंग से भूमिगत पानी का दोहन करते हैं। विभाग द्वारा पिछले डेढ़ साल में 180 ब्लीच हाउस पर कार्रवाई की गई थी। बाद में सभी ब्लीच हाउस संचालकों ने सील तोड़कर काम शुरू कर दिया। इन ब्लीच हाउस में 12 हजार श्रमिक काम करते हैं। जोकि रजिस्टर्ड नहीं हैं।
शहर में लगभग एक लाख श्रमिक ठेकेदार के माध्यम से फैक्टरियों में काम करते हैं। ये बार बार फैक्टरियों में नौकरी बदलते रहते हैं। ये पहले मना कर देते हैं कि उनको ईएसआई में रजिस्टर्ड न किया जाए, उनको पूरा वेतन मिलना चाहिए। इसलिए श्रमिकों का पूरा डेटा श्रम विभाग के पास नहीं पहुंच पाता।
-भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
फैक्टरियों का सर्वे हुआ था, लेकिन सर्वे सही नहीं हुआ। इसलिए अब तक यह निश्चित नहीं है कि शहर में कितनी फैक्टरियां हैं। उद्योगपतियों के इस संबंध में अपने तथ्य हैं। जब दोबारा सर्वे होगा, तब पता चलेगा कि शहर में कितनी फैक्टरी हैं।
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-क्षितिज कपूर, सहायक निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग
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