पंजाब के गांव खटकड़ से निकले दो सौ से अधिक किसानों की पदयात्रा पानीपत से आयोजित की गई पदयात्रा में शनिवार को शामिल हुए। शुक्रवार की रात ही पंजाब से किसान पानीपत आ गए और किसान भवन में ठहरे थे। शनिवार की सुुबह किसान भवन में जनसभा की गई, जिसके बाद पदयात्रा सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हुई। चार जगह जनसभा करते हुए शनिवार की रात मुरथल में विश्राम करना था, लेेकिन देर होने की वजह से पदयात्रा में शामिल किसानों ने समालखा के मच्छरौली गांव में विश्राम करने का फैसला लिया। रविवार की सुबह सिंघु बार्डर के लिए रवाना होंगे।
पंजाब से आए किसान 19 मार्च की रात को पानीपत किसान भवन में पहुंच गए थे, उनका स्वागत किया गया और शनिवार की सुबह किसान भवन में महासभा का आयोजन किया गया। किसानों ने देशभक्ति से ओतप्रोत रागिनी गाकर शहीद भगत सिंह को याद किया। इस अवसर पर सभा को संयुक्त किसान मोर्चा के इंद्रजीत सिंह, किसान ा के राष्ट्रीय नेता पी कृष्ण प्रसाद, धर्मपाल शील, सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, बलबीर सिंह जड़ाला, खेत मजदूर यूनियन प्रधान जगमाल सिंह, जनवादी महिला समिति से सविता, आशा रानी, स्वागत समिति के अध्यक्ष जयकरण कादियान, बीकेयू जिला प्रधान कुलदीप बलाना आदि ने संबोधित किया।
शहीद भगत सिंह की भांजी गुरजीत कौर ने पदयात्रा को रवाना किया
पदयात्रा का शुभारंभ करने के लिए शहीद भगत सिंह की भांजी गुरजीत कौर पंजाब से पानीपत आईं और किसान भवन में सर छोटू राम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पदयात्रा को तिरंगा झंडा दिखाकर रवाना किया। किसान सभा के राष्ट्रीय नेता पी कृष्ण प्रसाद ने भी झंडा दिखाया। गुरजीत कौर भी पदयात्रा में शामिल हुईं और किसानों के साथ असंध पुल तक गईं।
शहीद भगत सिंह की भांजी ने गुरजतीत कौर ने कहा कि सरकार को निजीकरण करने की बजाय सुधार करना चाहिए था। कृषि को तो कतई निजीकरण की दिशा में नहीं ले जाना चाहिए था। इससे किसानों की आय पर काफी असर पड़ेगा। यदि सरकार चाहे तो सुधार करने का प्रयास कर सकती है, लेकिन सरकार तो देश को पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी कर चुकी है।
पी कृष्णा प्रसाद ने कहा कि सरकार अंग्रेजों के राज को दोबारा स्थापित करने के प्रयास कर रही है। चंद देशी विदेशी पूंजीपतियों के लिए देश के किसानों और मजदूरों को गुलाम बनाने का काम कर रही है। तीन कृषि कानून और चार लेबर कोर्ट से यही होगा। महंगाई बढ़ रही है, आमदनी घट रही है, मजदूरों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। किसानों की जमीन हड़पने की साजिश है। इस साजिश के खिलाफ किसान 4 महीने से आंदोलन पर हैं।