माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। घरौंडा सहित कई अनाज मंडियों में बुधवार को भारी भीड़ रही। बाहर सड़कों पर लंबा जाम लगा रहा। मंडियों के अंदर भी निकलना दुश्वार रहा। करनाल अनाज मंडी में बुधवार को खरीद बंद रही लेकिन वीरवार को धान बेचने के लिए शाम से ही किसान ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर गेट पर पहुंच गए। जिससे हाइवे के दोनों ओर सर्विस लेन पर लाइनें लग गई हैं। बुधवार की शाम तक जिले में कुल छह लाख 31 हजार 770 क्विंटल की खरीद की गई है, जिससे अब तक की कुल खरीद 65 लाख 54 हजार 990 क्विंटल तक पहुंच गई है।
धान की खरीद इन दिनों पीक पर है, दिवाली तक मंडियों में यही स्थिति देखने को मिल सकती है, करीब 60 प्रतिशत से अधिक खरीद हो चुकी है लेकिन किसान रात दिन धान की कटाई में जुटे हैं। हैफेड के जिला प्रबंधक अमित कुमार ने बताया कि एजेंसी की ओर से जितना भी धान खरीदा है, उसका उठान के हिसाब से शतप्रतिशत भुगतान 24 घंटे के अंदर किया जा रहा है। डीएफएससी को करीब 200 और हैफेड को 45 राइस मिलर्स आवंटित किए गए हैं, जो सभी खरीद कर रहे हैं। इनके राइस मिलर्स में धान पहुंच रहा है। किसी भी डिफाल्टर राइस मिलर को इस बार धान का आवंटन नहीं किया गया है। डीएफएससी से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की शाम तक 40 लाख 62 हजार 750 क्विंटल का उठान कराया जा चुका है, जो कुल खरीद का 63 प्रतिशत है। अनाज मंडियों में अभी 23 लाख 97 हजार 240 क्विंटल धान पड़ा है, जिसका उठान किया जाना है।
मंडियों में किसानों को लूटा जा रहा है
रसूलपुर गांव के महेंद्र ने बताया कि इस समय मंडियों में धान की अधिकता के कारण राइस मिलर्स धान का सही भाव नहीं लगा रहे हैं, कोई 2000 लगा रहा है तो कोई 2100 रुपये प्रति क्विंटल में धान मांग रहा है। कोई अधिकारी, मार्केट कमेटी के प्रधान या सदस्य नहीं आ रहे किसान की मदद के लिए। किसानों को कम भाव देकर लूटा जा रहा है। कई कई दिन के बाद धान बिक रहा है।
दस क्विंटल कम निकल रहा धान
नगला मेघा गांव के मनोज सैनी ने बताया कि दो दिन पहले धान लेकर आए थे, अभी नहीं बिक पाया है। पहले से ही मौसम की मार से धान आठ से 10 क्विंटल प्रति एकड़ कम निकल रहा है, अब मंडियों में एमएसपी नहीं मिल रहा है, जिससे किसान इस बार धान की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार को इस मामले में ध्यान देकर किसानों की मदद करनी चाहिए।