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कारगिल विजय दिवस: अजमेर के नाम पर सीना गर्व से हो जाता है चौड़ा

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समालखा। शहीद अजमेर। फाइल फोटो। - फोटो : Panipat
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समालखा। देश की रक्षा करते हुए 13 फरवरी 2001 को गांव जौरासी के शहीद अजमेर के बारे में बात करते ही उनके परिजनों और ग्रामीणों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। शहीद की याद में बनाए गए स्टेडियम से सैकड़ों युवक करियर बनाने की दिशा में बढ़ चुके हैं। वहीं पुलिस में एएसआई भाई जसमेर की इच्छा है कि सैनिकों के बच्चों के रोजगार के लिए विशेष रूप से अलग से नौकरियां निकालनी चाहिए।
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गांव जौरासी खालसा का अजमेर ने 24 वर्ष की आयु में करगिल में दुश्मनों के साथ लोहा लेते हुए अपना बलिदान कर दिया। उसकी शहादत पर क्षेत्र के लोग गौरवान्वित हैं। शहादत पर तिरंगे में लिपटा अजमेर का पार्थिव शरीर जब पैतृक गांव पहुंचा था तो गांव के बाहर ही उसके नाम से स्टेडियम बनाने की घोषणा करते ही स्टेडियम की नींव रख दी गई थी।
सैकड़ों बच्चे बना रहे करियर
शहीद अजमेर सिंह स्टेडियम आज जौरासी सहित आसपास के गावों के युवाओं के लिए खेलों में आगे बढ़ने के एक विकल्प के तौर पर उभरकर सामने आया है। इसके साथ ही शहीद अजमेर के भाई जसमेर भाई की याद में हर वर्ष कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन करवाते हैं। जसमेर का कहना है कि सरकार को यहां पर और सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
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