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जींद-अंबाला रेलवे लाइन के बीच सीवरेज लाइन बिछाने परियोजना फिर लटकी

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सीवरेज प्लानिंग क्लस्टर- 2 के तहत अंबाला-दिल्ली और रोहतक-जींद रेलमार्ग के बीच की 14 कॉलोनियों में गंदे पानी की निकासी के लिए बनाया गया सीवरेज प्रोजेक्ट एक बार फिर से लटक गया है। इसके लिए नगर निगम ने दो बार टेंडर लगाया, लेकिन इस काम को करने के लिए कोई योग्य एजेंसी ही सामने नहीं आई। वहीं, बड़े ठेकेदारों ने भी निगम के इस काम से हाथ तक खींच लिए हैं। अब इस प्रोजेक्ट को निगम ने एसएलटीसी यानी स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी की मीटिंग में रखा है। ये मीटिंग सोमवार को शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय में होनी तय थी, लेकिन अब इसे 19 मार्च तक स्थगित किया गया है। इसमें कमेटी फैसला लेगी कि इस प्रोजेक्ट को अमरूत योजना में जोड़ा जाएगा या फिर इसे अलग-अलग कर दो भागों में करवाया जाएगा।
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निगम के इंजीनियर ने बताया है कि सीवरेज पाइप लाइन बिछाना एक अलग काम है, जबकि एसटीपी बनाकर तैयार करना एक अलग काम है। इन दोनों कामों का अनुभव रखने वाली योग्य कंपनियां या तो हैं ही नहीं, या कम हैं। अगर है तो इस टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले रही हैं, इसलिए दो बार में भी इस काम को लेने के लिए कोई आगे नहीं आया है। जिसके बाद अब इन दोनों कामों को कमेटी अलग-अलग करवाने की अप्रूवल दे सकती है।
ये थी परियोजना, लाखों लोगों को होना है फायदा
इस परियोजना के तहत 97.12 करोड़ रुपये की लागत से 71 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाई जानी थी। इसमें दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाने हैं, इसके अलावा तीन आईपीएस यानी इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन भी बनने थे। इसमें 15 एमएलडी का एसटीपी देव कॉलोनी और 25 एमएलडी का एसटीपी बरसत रोड पर बनाया जाना है। मुख्यालय ने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर पहले ही मंजूरी दी थी, इसके बाद प्रोजेक्ट की डीएनआईटी को पास किया गया और निगम ने इसके दो बार टेंडर भी लगाए, लेकिन इसमें एक भी प्रतिभागी ऐसा शामिल नहीं हो पाया, जिसके पास इस काम का पूरा अनुभव हो।
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दो भागों में है शहर की सीवरेज व्यवस्था
शहर के सीवरेज प्रोजेक्ट को निगम ने दो भागों में बांटा है। पहला भाग अंबाला से दिल्ली रेलवे लाइन से बायीं तरफ का है। यहां से जीटी रोड तक लगते वार्डों में पहले ही अमरूत योजना के अंतर्गत सीवरेज का काम चला हुुआ है। यह काम 8 वार्डों की करीब 52 कॉलोनियों में हो रहा है। अब रेलवे लाइन से राइट साइड यानी मॉडल टाउन की तरफ डीपीआर के तहत सीवरेज का काम होगा।
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ये था प्लान, जो लटका
शहर के सीवरेज प्लान के अंतर्गत हालिया अप्रूवड 76 कॉलोनियों में सीवरेज व्यवस्था को उपलब्ध करवाना था। इसके पहले भाग में अमरूत योजना का काम था, जिसमें 52 कॉलोनियों को शामिल किया गया है। दूसरा भाग में बाकी की 28 कॉलोनियों में सीवरेज लाइन को बिछाना है। इन नई 28 कॉलोनियों को दो भागों में बांटा गया है। जिस पर करीब 134 करोड़ की लागत आएगी। इसमें सीवरेज व एसटीपी प्लांट बनाने के साथ इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी 6 साल के लिए रखी गई है।
वर्जन-
इस प्रोजेक्ट के निगम ने दो बार टेंडर लगाए कोई सामने नहीं आया तो इसका मुद्दा एसएलटीसी को दिया गया है। इसमें फैसला होगा कि काम किस प्रकार से होना चाहिए। जिसके बाद निगम फिर से हिदायत अनुसार टेंडर लगा वर्क आर्डर जारी करेगा। इससे इन 14 कॉलोनियों के लाखों लोगों को फायदा होगा।
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- महिपाल सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम, पानीपत।
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