पानीपत। जेबीएम कंपनी के करीब 250 कर्मी बुधवार को हड़ताल पर चले गए जिसके चलते शहर में डोर-टू-डोर कूड़े का उठान नहीं हो सका।
शहर में एक दिन में करीब 300 टन कूड़ा जमा हो गया। कंपनी के कर्मियों ने नगर निगम के डीएमसी से मिलकर मानदेय की मांग की। वहीं कंपनी ने नगर निगम की ओर से करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान न मिलने की बात कही। नगर निगम ने इन सबके बीच कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। नगर निगम और जेबीएम कंपनी के बीच खींचतान का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
जेबीएम कंपनी के कर्मियों ने बुधवार को डोर-टू-डोर कूड़ा उठान छोड़ दिया। कर्मी एकजुट होकर डीएमसी अरुण भार्गव से मिले। राजबीर और विनोद ने बताया कि उनको पांच महीने से मानदेय नहीं मिल पाया है। वे कंपनी अधिकारियों से मानदेय के लिए मिलते हैं तो उनको नगर निगम से भुगतान के बाद मानदेय देने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि नगर निगम और कंपनी के बीच विवाद का खामियाजा कर्मियों को भुगतना पड़ता है। उनको अपने घर का खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया है। वहीं जेबीएम के कूड़ा उठान न करने पर इंसार बाजार समेत शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए।
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जेबीएम कंपनी को शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में 250 गाड़ी लगानी हैं। कंपनी अब तक 80 गाड़ी ही लगा पाई है। नगर निगम अधिकारी कंपनी के वाहनों की कई बार जांच कर चुके हैं। नगर निगम ने कंपनी पर अगस्त महीने में करीब 1.37 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कंपनी का इन महीनों में 1.34 का बिल बना है।
नगर निगम अधिकारियों ने कंपनी का बिल मंजूर नहीं किया। निगम ने कंपनी पर अक्तूबर महीने में फिर से सवा करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया। नगर निगम अधिकारी जुर्माना राशि से वाहन खरीदने की तैयारी में हैं।