पानीपत। कुटानी रोड स्थित अवध धाम में श्री अवध धाम मंदिर में वार्षिक महोत्सव और श्रीमद्भागवत कथा सत्संग समारोह का सोमवार को पांचवां दिन रहा।
कथावाचक भागवत रसिक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि साधना की एक अपनी स्वतंत्रता होती है और वह अनावर्त है। साधना शब्द इतना सरल है लेकिन उसको पाना उतना ही कठिन है। साधना शक्ति से प्राप्त की जा सकती है और शक्ति परमात्मा की भक्ति से प्राप्त हो सकती है। जब भक्ति में प्रबल हो जाएंगे तब आत्मबल बढ़ेगा और आत्मबल से आप साधना को संपन्न कर सकते हैं।
महाराज ने कहा कि गुरु अगर साधना के पथ का प्रदर्शक हो जाए तो इससे बड़ी साधना की परिपक्वता दूसरी नहीं हो सकती। साधक के जीवन में साधना की परिपूर्णता केवल साध्य की प्राप्ति में नहीं है। क्योंकि साधना के प्रति स्वतंत्र अपना मोह है। साधना साध्य की प्राप्ति के बाद भी बड़ी पूर्ण है। भगवत प्राप्ति के बाद भी साधु भजन ही करता है। साधना की अपनी स्वतंत्रता है और वो अनवरत है। अखण्ड है। साध्य की प्राप्ति के बाद भी साधना अवस्थित रहती है, विकसित होती है और स्थापित हो जाती है।
उन्होंने कहा कि भोग तब तक ही नहीं लगाया जाता जब तक ठाकुरजी न खाएं। जिस दिन तुम्हारी लगी हुई थाली से उठा लिया उससे पहले लगाते थे अब खिलाओगे। दोनों में भेद आ गया। इसलिए साधक के जीवन में साध्य की प्राप्ति साधना का इतना बड़ा प्रमाण नहीं है बल्कि साधक के जीवन में साधना का दृढ़ता से अनुपालन होना ही उसके जीवन में प्रसन्नता का आधार है। नाम अगर ठीक से चलता रहा तो श्रीकृष्ण सुलभ ही हैं। कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. अर्चना गुप्ता, अशोक बांगा, कृष्ण गोपाल शेट्टी, दीपक मिगलानी, महेश थारेजा, प्रीतम गुज्जर, विशाल वर्मा व इंद्रजीत कथूरिया उपस्थित रहे।