पानीपत। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पानीपत में ऑक्सीजन सिलिंडर, रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन बेड की कमी में सिविल अस्पताल के दो डॉक्टरों समेत तीन लोगों भी संदिग्ध भूमिका सामने आई है। तीनों के खिलाफ जांच बैठा दी गई हैं। तीनों पर महामारी के दौरान निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने आरोप लगाया गया है। हालांकि तीनों पर आरोप सिद्ध नहीं हैं। जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि ये दोषी हैं या नहीं।
महानिदेशक स्वास्थ्य एवं सेवा डॉ.वीना सिंह की ओर से दो डॉक्टरों समेत एक स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया गया है। सिविल अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड के इंचार्ज रहे डॉ. केतन भारद्वाज, डॉ. वीरेंद्र ढांडा और स्वास्थ्य कर्मी जयदीप राठी की भूमिका पर संदेह जताया गया है। मुख्यालय को इनके खिलाफ मिली शिकायत में आरोप हैं कि महामारी के दौरान मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया। इनसे निजी अस्पतालों ने मोटी रकम वसूली।
वहीं रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी में भी निजी अस्पतालों का फायदा पहुंचाया गया। हालांकि यह फायदा किस तरह पहुंचाया गया, यह स्पष्ट नहीं है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यालय से जांच कराने का आदेश सीएमओ पानीपत डॉ. जितेंद्र कादियान को करने के लिए दिया गया, जिन्होंने इस मामले की तह तक जाने की जांच करने का निर्देश सिविल अस्पताल पानीपत के प्रिसिपल मेडिकल ऑफिसर (पीएमओ) को दिया गया। हालांकि पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने बताया कि मुख्यालय स्तर से ही तीनों की जांच की जाएगी।