राज्य भर में दो लाख से अधिक उद्योग व वाणिज्य कंपनियां है, लेकिन प्रदेश में केवल 57 उद्योगों और वाणिज्यिक कंपनियों के पास केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से पानी निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र है। प्रदेश के ये उद्योग और कंपनियां हर रोज 8 करोड़ से अधिक भूजल का दोहन करती है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के अनुसार, सभी भूजल उपयोगकर्ताओं को भूजल निष्कर्षण के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) से एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य है। पिछले 10 साल में हरियाणा का भू जल 8 फुट तक गिर चुका है। अब लगातार गिरते भू-जल के कारण पानीपत के समालखा, सनौली व बापौली को डार्क जोन में रखा गया है। एनजीटी के आदेश के बाद, सीजीडब्ल्यूबी ने अधिसूचना जारी की है। इसमें इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सीजीडब्ल्यूए से वैध एनओसी के बिना भूजल खींचने वाले सभी उपयोगकर्ता एनजीटी की ओर से तय किए जाने वाले पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति व नुकसान का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के 14 जिलों में केवल 57 उद्योगपतियों या वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के पास सीजीडब्ल्यूए से एनओसी है, जबकि छह जिलों में किसी के पास भूजल लेने के लिए एनओसी नहीं है। सूत्रों का कहना है कि शहर में 400 से अधिक पंजीकृत रंगाई इकाइयां चल रही हैं। इनमें से 300 सेक्टर 29 पार्ट -2 में और अन्य सेक्टर 25 पार्ट -1, 2 और सेक्टर 29 पार्ट -1 में हैं। अवैध रंगाई इकाइयों के लिए, वे पूरे शहर में फैले हुए हैं। रंगाई इकाइयों द्वारा भूजल का निष्कर्षण लगभग 80 मिलियन लीटर प्रति दिन है। अप्रैल और मई में विभिन्न रंगाई और कपड़ा इकाइयों के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (सीपीसीबी) की टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान टीमों ने पाया कि ये इकाइयां प्रवाह मीटर स्थापित किए बिना भूजल निकाल रही थीं। नाम न छापने की शर्त पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्होंने भूजल के पुर्नभरण के लिए कोई प्रणाली स्थापित नहीं की है। यहां तक की सरकारी इकाइयां- पानीपत थर्मल पावर प्लांट, नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) भी बिना एनओसी के भूजल निकाल रही हैं। सूत्रों ने कहा कि आईओसीएल के पास भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) ने मई में सीजीडब्ल्यूबी से एनओसी ले ली है। उद्योगों को एनओसी लेने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया है। एनजीटी पानीपत के उन 47 उद्योगों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दे चुका है, जो बिना एनओसी के भूजल का दोहन कर रहे थे।
ये बहुत चौंकाने वाला है- राठी
आरटीआई कार्यकर्ता अमित राठी ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि केवल 57 को सीजीडब्ल्यूए से जमीन से पानी निकालने की वैध अनुमति है, जबकि हजारों औद्योगिक इकाइयां, बड़े डेवलपर्स और खनन इकाइयां फरीदाबाद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, झज्जर, रोहतक, पलवल में चालू हैं।
भूजल की निकासी की जांच हो
पर्यावरण विद नेम चंद जैन ने कहा कि द्वारा हरियाणा के अधिकतम समूहों को अति-शोषित क्षेत्र में शामिल किया गया है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भूजल की निकासी की जांच होनी चाहिए और अधिकारियों द्वारा गंभीरता से निगरानी की जानी चाहिए।
इन जिलों में इतने उद्योगों के पास एनओसी
जिला इतने उद्योगों के पास एनओसी
अंबाला 5
फरीदाबाद 6
भिवानी 2
गुरूग्राम 6
हिसार 2
झज्जर 5
महेंद्रगढ़ 1
मेवात 1
पलवल 2
पंचकुला 4
पानीपत 7
रोहतक 2
सोनीपत 6
रेवाड़ी 7
यमुनानगर 1
कुल 57
इन जिलों में किसी के पास नहीं एनओसी
फतेहाबाद, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल व सिरसा में किसी भी उद्यमी व कंपनी के पास भू जल का दोहन करने के लिए एनओसी नहीं है। यहां पर बिना एनओसी के ही करोड़ों लीटर भूमिगत पानी का दोहन किया जा रहा है।
सरकार राज्य स्तर पर भू जल प्राधिकरण का करें गठन : राणा
हरियाणा में राज्य स्तर पर भू जल प्राधिकरण का गठन नहीं किया है। उनको दिल्ली से ही एनओसी लेनी पड़ती है। इनमें उनको भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानीपत में 80 से ज्यादा उद्यमियों ने एनओसी के लिए अप्लाई किया है, लेकिन एनओसी मिलने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। इसलिए इसको आसान करने के लिए राज्य स्तर पर बोर्ड का गठन होना चाहिए।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन