एनजीटी व एचएसपीसीबी की सख्ती व लगातार कार्रवाई के बाद भी कुछ उद्यमी वेस्ट जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब उन्होंने रात को वेस्ट जलाना शुरू कर दिया है। इसलिए एचएसपीसीबी के अधिकारियों ने फैक्टरियों में छापामारी के लिए रात का ही वक्त चुना है। उद्यमी एक रुपये किलोग्राम के हिसाब वाला प्लास्टिक, रबर, चप्पल जूते जला रहे हैं। इसी कारण शहर में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। एक सप्ताह में एचएसपीसीबी 40 फैक्टरियों में छापामारी कर चुका है। इनमें 25 नियमोंका उल्लंघन करते मिली थी। इनको कारण बताओ नोटिस दिया गया, जबकि 13 उद्योगों पर ताले लग चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों के अनुसार रात 2 से सुबह 5 बजे तक उद्योगों में वेस्ट जलाया जाता है।
जानकारी के अनुसार उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी अब भी सेक्टर 29 व पार्ट 11 की ग्रीन बेल्ट में ही बह रहा है। इससे पौधों को खासा नुकसान हो रहा है। ये प्रदूषित पानी भूमिगत जल में मिल रहा है। इसी कारण भूमिगत जल भी पीने योग्य नहीं रहा है। ये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2018 में की गई जांच में साबित हो चुका है। शहर के पानी में साइनाइड की 0.3 प्रतिशत मात्रा मिल चुकी है।
सीवरेज के कारण प्रदूषित पानी निकल रहा है
सेक्टर 29 व 25 में सीवरेज ब्लॉकेज की बड़ी समस्या है। इसी कारण उद्योगों का केमिकल युक्त पानी सड़कों पर बह रहा है। खाली प्लॉट में खड़ा है। उद्योगों से हर रोज 42 एमएलडी वाटर निकलता है। 21 एमएलडी क्षमता वाला नया प्लांट अभी ट्रायल पर है। दूसरा 21 एमएलडी वाटर क्षमता वाला प्लांट चल रहा है। लेकिन सीवरेज ब्लॉकेज होने के कारण करीब 8 एमएलडी वाटर सड़कों पर बह जाता है।
2 साल में 135 उद्योगों को बंद करने के हुए हैं निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट में देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों पानीपत 11वें नंबर पर रहा। दो साल में 110 बड़े उद्योगों को बंद करने व 160 से अधिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। बिना अनुमति के भू-जल का दोहन करने वाले 48 उद्योगों को भी हाल में क्लोजर नोटिस जारी किया गया है। शहर स्वच्छता में देश में जहां 164वें स्थान पर हैै।
प्रदूषण मापने के लिए तैयार किया सीईपीआई
एनजीटी की ओर से उद्योगों से हो रहा प्रदूषण मापने के लिए काम्प्रिहेंसिव इनवायरमेंटल पॉल्यूशन इंडेक्स(सीईपीआई) तैयार किया गया। इसके तहत हवा, पानी और जमीन पर हो रहे प्रदूषण को अलग-अलग माप कर स्कोर निकाला जाता है, इसमें पानीपत को 83.54 स्कोर मिला है। इनमें वायु को 66 व पानी को 72.75 स्कोर मिला है।
ग्रीन कैटेगरी में 25 उद्योग आते हैं, पर्यावरण के लिए घातक-
एनजीटी ने पानीपत में लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पानीपत के रेड कैटेगरी में आने वाले 370 और ऑरेंज कैटेगरी में आने वाले 222 उद्योगों पर जुर्माना ठोका है। इन दोनों कैटेगरी के बड़े उद्योगों को 1 करोड़ रुपए, मध्यम को 50 लाख छोटे उद्योगों को 25 लाख रुपए एनजीटी में जुर्माने के तौर पर जमा कराने होंगे। पानीपत में ग्रीन कैटेगरी में 25 उद्योग आते हैं, जोकि पर्यावरण के लिए घातक नहीं माने गए हैं।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम का असर नहीं-
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए चिमनियों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू किया है। जिसकी मॉनिटरिंग दिल्ली और चंडीगढ़ से होती है। इसके बाद वायु प्रदूषण पर रोक नहीं लग रही है। सेक्टर 29 में कई उद्योग रात को व अलसुबह वेस्ट जलाते हैं। धुएं से कार्बन मोनोक्साइड निकलती चिमनियों से निकलने वाले कार्बन वातावरण में ऑक्सीजन के साथ कार्बन मोनोक्साइड बना देते हैं। सांस के लिए यह घातक है। बोर्ड के नियम के अनुसार काला धुआं चिमनियों से नहीं निकलना चाहिए। सफेद धुआं प्रदूषण न फैलाने की पहचान है।
डायर्स एसो. प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा कि जो उद्योग कूड़ा-कर्कट और प्लास्टिक वेस्ट जला रहे डायर्स एसोसिएशन उनका साथ नहीं देगी। इस बारे में उद्यमियों को पहले भी सचेत किया जा चुका है।
हम अपनी कार्रवाई कर रहे हैं, इसे जारी रखेंगे : संजीव
हम वेस्ट जलाने वाले उद्योगों पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ उद्योग रात को वेस्ट जला रहे हैं। हम भी रात को छापामारी कर रहे हैं। नियमों के खिलाफ चलने वाले उद्योगों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
संजीव बुद्घिराजा, आरओ, एचएसपीसीबी
पानीपत। सेक्टर-29 पार्ट 2 मैं सड़क पर भरा फैक्ट्री का गंदा पानी।- फोटो : Panipat