फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एचएसपीसीबी ने 15 दिन में 1200 उद्योगों पर कार्रवाई के दिए निर्देश, 12 हजार करोड़ का उद्योग खतरे में

विज्ञापन
विज्ञापन
एनजीटी के बाद अब हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी पीएनजी की सप्लाई नहीं लेने वाले उद्योगों पर सख्त दिखानी शुरू कर दी है। अब एचएसपीसीबी ने सभी रीजनल ऑफिसर को निर्देश जारी किए है कि वो 15 दिन में उद्योगों पर कार्रवाई कर उन्हें रिपोर्ट सौंपे। ये रिपोर्ट एचएसपीसीबी एनजीटी को सौंपेगा। इसके बाद उन उद्योगों की बिजली व पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। ये कार्रवाई उन उद्योगों पर की जाएगी जिसमे बॉयलर का इस्तेमाल होता है। पानीपत में भी ऐसे 1200 उद्योग हैं। इन पर कार्रवाई से पानीपत के 12 हजार करोड़ के उद्योग पर ताले लगेंगे और करीब 25 हजार लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें पीएनजी पर सब्सिडी दी जाए और पीएनजी लेने की समय सीमा भी बढ़ाई जाए। पानीपत में मात्र एक उद्योग में ही पीएनजी की सप्लाई है।
विज्ञापन

सेक्टर 29 में पीएनजी की नहीं डली लाइन
अब तक सेक्टर 25, 25 पार्ट टू, सेक्टर 29 पार्ट टू में पीएनजी की सप्लाई की लाइन डल चुकी है, लेकिन पार्ट टू में अब भी पीएनजी की सप्लाई नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग सेक्टर 29 पार्ट टू के उद्यमियों को कुछ राहत दे सकता है। उद्योगपतियों का मत है कि सरकार पीएनजी संबधित इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल उद्योगों में कोयल, पेट्रोल व डीजल से काम चलता है। पीएनजी का सेटअप भी उद्योगों में नहीं है। पीएनजी की सप्लाई लेने से पहले उद्योग का पूरा सेटअप भी चेंज करना पड़ेगा। इससे उद्योगों पर ताले लटकने का भी खतरा है। सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, नाकि उद्योगों को बंद करने की प्लानिंग तैयार करनी चाहिए। पानीपत टेक्सटाइल नगरी एशिया की सबसे बड़ी टेक्सटाइल नगरी है।
एनजीटी ने सीबीसीबी से मांगी थी 15 दिन में रिपोर्ट
गत 18 दिसंबर 2018 को एनजीटी ने मीटिंग की एनसीआर के सभी उद्योगों को 31 मार्च 2019 तक नेचुरल गैस पाइप लाइन में परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन निर्देशों पर सही प्रकार से काम नहीं हुआ। इसके बाद एनजीटी ने दोबारा चार अप्रैल को मीटिंग कर सीपीसीबी को निर्देश दिए कि सभी 23 जिलों के उद्योगों में 30 अप्रैल तक नेचुरल गैस की सप्लाई दी जाए और पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले ईंधन को बंद किया जाए। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी ने भी एक जनवरी 2019, 22 फरवरी, 23 अप्रैल, 15 मई व 31 मई को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मीटिंग की और एनजीटी के निर्देशों पर नेचुरल गैस पाइप लाइन का इस्तेमाल नहीं करने वाले उद्योगों में सप्लाई कराने के निर्देश दिए, लेकिन धरातल पर ये कार्य नहीं हुआ। अब एनजीटी ने 23 जिले के उन उद्योगों को बंद करने के निर्देश दे दिए है जो पीएनजी में परिवर्तित नहीं थे। एनजीटी ने सीपीसीबी से इस संबंध में 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी थी।
विज्ञापन

एसी दफ्तर में बैठकर बनाते हैं उद्योगों के लिए प्लानिंग : विनोद
चैंबर ऑफ कॉमर्स के जिलाध्यक्ष विनोद खंडेलवाल ने कहा कि आज के समय में उद्योग चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। छोटे व मध्यम वर्ग के उद्योगपतियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार एक एक करके शर्तें लागू कर रही है। सरकार जो भी शर्तें लागू करना चाहती है। उन्हें एक साथ लागू कर दें। एसी में बैठकर उद्योगों के लिए प्लानिंग करने वालों को धरातल की स्थिति का अंदाजा नहीं है।
110 उद्योगों को बंद करने हो चुके हैं निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) लगातार प्रदूषण कम करने को लेकर सख्ती बरत रहा है। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी दो साल में पानीपत के 110 बड़े उद्योगों को बंद करने व 160 को नोटिस जारी कर चुकी है। अब एनजीटी ने पाइन नेचुरल गैस नहीं लेने वाले सभी उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के ये निर्देश दिल्ली-एनसीआर एवं आसपास के 23 जिलों को जारी किए गए हैं, जिनसे दिल्ली की आबोहवा खराब हो रही है। एनजीटी के इन आदेशों के दायरे में पानीपत समेत 23 जिलों के लगभग 60 प्रतिशत उद्योग आते हैं। एनजीटी के इन निर्देशों से उद्योगपतियों में रोष बना हुआ है।
रिफाइनरी पर लगाया था 17 करोड़ का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पानीपत रिफाइनरी पर वायु प्रदूषण फैलाने और भूजल खराब करने के आरोप में 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। रिफाइनरी को उक्त राशि एक माह में सीपीसीबी में जमा करानी थी। एनजीटी ने रिफाइनरी को जल्द ही अपनी व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश दिए थे। एनजीटी के चेयरपर्सन आदर्श कुमार, ज्यूडीशियल मेंबर एसपी वांगड़ी, जस्टिस के रामाकृष्णन, ज्यूडीशियल मेंबर व एक्सपर्ट मेंबर नागेन नंदा ने डीसी सुमेधा कटारिया, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर 10 मई 2019 को मुआवजा वसूलने के आदेश जारी किए थे। 5 जुलाई को रिफाइनरी को जुर्माना जमा कराना पड़ा था।
वर्जन
एनसीआर के दायरे में आने के बाद पानीपत की इंडस्ट्री दिन ब दिन तबाह होती जा रही हैं। छह रुपये किलो की पीएनजी 36 रुपए किलो के भाव में सरकार उन्हें देगी तो वह कारोबार कैसे कर पाएंगे। एक वॉयलर को बदलने में करीब छह माह का वक्त लग जाएगा। एक टन से तीन टन तक के वॉयलर में करीब 30 लाख और तीन से पांच टन तक के वॉयलर में 50 लाख तक का खर्चा आ जाएगा। पानीपत में करीब 1200 इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनमें वॉयलर का प्रयोग किया जाता है। सीपीसीबी ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। ऐसे में पानीपत के उद्यमियों को अपनी- अपनी इंडस्ट्री को एशिया में किसी और स्थान पर शिफ्ट करना पड़ जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इंडस्ट्रियों को तबाह करने में जुटा हुआ है।
विज्ञापन

भीम सिंह राणा, सेक्टर- 29 पार्ट टू डायर्स एसोसिएशन प्रधान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें