माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर विपरीत असर पड़ा है। पिछले ऑर्डर कैंसिल हो गए हैं और क्रिसमस के ऑर्डर भी हाथ से निकल गए हैं। उद्यमियों ने अब नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। कुछ दूसरे देशों के माध्यम से अमेरिका माल भेजने की सोच रहे हैं, जबकि कुछ विश्व की दूसरी मंडियों को तलाश रहे हैं।
बाइंग एजेंट एसोसिएशन (बीएए) ने इन सबके बीच सोमवार को सेक्टर-25 स्थित एक होटल में निर्यातकों के साथ बैठक की। जिसमें हर विषय पर बारीकी से चर्चा की। बीएए के प्रतिनिधियों ने कहा कि ट्रंप आज हैं, कल नहीं होंगे। वे चिंता न करें। इसके लिए नए रास्ते तलाश किए जाएंगे। बीएए के पूर्व चेयरमैन मनोज राणा ने खर्च कम करने के नए तरीके बताए। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को चीन की तरह सोचना होगा। वे सैंपलिंग के चार्ज लेना शुरू करें। उत्पाद को पोर्ट तक भेजने का चार्ज खरीदार से लिया जाए। निर्यातकों के पास बाजार की कमी नहीं है। यूएसए के अलावा यूरोप से लेकर रशिया तक अपना उत्पाद बेच सकते हैं।
दूसरे देश के माध्यम से माल भेजना गलत
बीएए की महासचिव आंचल कंसल ने कहा कि कुछ निर्यातक अपना माल दूसरे देशों के माध्यम से अमेरिका भेजने का भी रास्ता निकाल रहे हैं। ऐसा करना कंपनी के साथ दिक्कत पैदा करने वाला होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दूसरे देश में माल भेजकर, उनका लेबल लगाकर बिक्री करने की कह रहे हैं। ऐसा करने से कंपनी पूरी तरह से प्रतिबंधित हो सकती है। जेल भी जाने की नौबत आ सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसा वे ही लोग कर सकते हैं जो अगर 70 प्रतिशत माल भारत और बाकी दूसरे देश में बनाकर बेचते हैं।
दूसरे देश का सहारा लेने से बढ़ेगा खर्च
द पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल ने कहा कि टैरिफ से बचने के लिए किसी दूसरे देश में अपने उत्पाद को अंतिम रूप देकर बेचना आसान नहीं है। इससे लागत बढ़ जाएगी। इसमें कुछ गलत होता है तो जेल भी हो सकती है। मौके पर हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा, हैंडलूम एक्सपोर्टर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा, बीएए के वाइस चेयरमैन सुमित छाबड़ा व प्रमोद राणा मौजूद रहे।