पानीपत। पुलिस थानाें में तीन नए कानूनों के अंतर्गत लोगों के हित में काम किया जाएगा। इनके अंतर्गत किसी भी मामले में जीरो प्राथमिकी के बाद मुख्य प्राथमिकी करनी होगी। इसके साथ ई-एफआईआर में भी सावधानी बरतनी होगी। साथ गंभीर अपराधों में पुलिस को फोरेंसिक विशेषज्ञ की मौजूदगी में ऑडियो और वीडियोग्राफी करनी होगी। साथ ही किसी भी आरोपी गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना होगा।
पुलिस मुख्यालय में इनके लिए शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें पुलिस अधिकारियों को तीनों नए कानूनों के प्रमुख प्रावधानों व उनके व्यावहारिक उपयोग के संबंध में जानकारी देकर जागरूक किया। पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह व जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने इनके बारे में विस्तार से बताया।
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि तीन नए कानून, भारतीय न्याय सहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 व साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई 2024 से प्रभावी रूप से लागू किए गए हैं। भारतीय न्याय सहिता ने भारतीय दंड संहिता की जगह ली है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने दंड प्रक्रिया संहिता की जगह ली है और साक्ष्य अधिनियम ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। नए कानूनों में दिए गए प्रावधानों में प्रत्येक कार्रवाई के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित गई है। मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के माध्यम से शिकायत मिलने के तीन दिन में प्राथमिकी दर्ज करने की समय सीमा दी गई है। तीन से सात साल की सजा के प्रावधान के मामले में थाना प्रभारी को उप पुलिस अधीक्षक या उनसे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेकर 14 दिन के अंदर प्रारंभिक जांच पूरी करनी होगी और यदि संज्ञेय अपराध बनता होगा तो प्राथमिकी दर्ज करनी होगी। इसके बाद पीड़ित को प्राथमिकी की प्रगति बारे एसएमएस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यमों द्वारा 90 दिन के अंदर जानकारी देनी जरूरी है। इस दौरान उन्होंने अपराध की रोकथाम, अनुसंधान की पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया को अधिक तीव्र और सुलभ बनाने को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने पुलिस अधिकारियों को शून्य प्राथमिकी, गिरफ्तारी व अनुसंधान की प्रक्रिया, ई-प्राथमिकी, समयबद्ध न्याय प्रणाली, महिला एवं बाल संरक्षण से संबंधित प्रावधान, फॉरेंसिक विज्ञान एंव प्रौद्योगिक के बढ़ते उपयोग सहित एनडीपीएस एक्ट, एसएसटी एक्ट, जेजे एक्ट के बारे में विस्तार से समझाया।
तीन साल से कम की सजा के प्रावधान के मामलों में कमजोर व 60 वर्ष से अधिक आयु के आरोपी की गिरफ्तारी उप पुलिस अधीक्षक या उससे उच्च अधिकारी की अनुमति के बाद ही होगी। इस मौके पर डीडीए अश्वनी, एडीए संदीप, डीएसपी सुरेश कुमार सैनी, डीएसपी नरेंद्र सिंह, डीएसपी राजबीर सिंह व ट्रेनी डीएसपी ज्योति मौजूद रही।
जीरो प्राथमिकी किसी भी पुलिस स्टेशन द्वारा अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना दर्ज की जा सकती है। यह किसी संज्ञेय अपराध के संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर की जा सकती है। इस स्तर पर कोई नियमित नंबर आवंटित नहीं किया जाता है। जीरो प्राथमिकी प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस स्टेशन एक नई प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जाती है।