पानीपत। आसाराम बापू केस में मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला की हत्या के प्रयास में आरोपी नारायण साईं समेत चार पर शुक्रवार को पानीपत की अदालत में आरोप तय हुए। चारों आरोपियों को शुक्रवार की सुबह 11 बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निशांत शर्मा की अदालत में पेश किया गया। आरोप तय होने के बाद शाम सवा पांच बजे साईं को वापस सूरत जेल भेज दिया गया, जहां वह दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे हैं। वहीं दो आरोपियों को करनाल जेल भेजा गया है, जबकि चौथा आरोपी बेल पर बाहर है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 तारीख को होगी, जब साईं की गवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाएगी।
सनौली निवासी महेंद्र चावला पर 13 मई 2015 में हमलावरों ने घर में घुसकर दो फायर किए थे। इसमें एक गोली उनके कंधे और दूसरी दीवार में लगी थी, जिसके बाद हमलावर फरार हो गए थे। महेंद्र चावला ने आरोप लगाया था कि आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं पर दुष्कर्म के मामले में वह गवाह हैं, इसलिए उन पर नारायण साईं ने हमला कराया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 307 समेत विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने नारायण साईं, हमलावर कार्तिक, नीरज और निशांत राज घणघस को गिरफ्तार किया था। निशांत राज को जमानत मिल गई थी जबकि बाकी को जेल भेज दिया गया था। इस मामले में पांचवां आरोपी फरार चल रहा है।
शुक्रवार को न्यायाधीश निशांत शर्मा की अदालत में आरोप तय करने की तारीख रखी गई थी, जिसमें शुक्रवार सुबह 11:03 मिनट पर नारायण साईं समेत चारों आरोपी अदालत में पेश हुए। पहले दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं और दोपहर बाद करीब चार बजे आईपीसी की धारा 120-बी, 452, 307,195ए, 506 के तहत आरोप तय किए गए। अब इस मामले में ट्रायल चलेगा। महेंद्र चावला की तरफ से एडीए अरविंद्र शर्मा ने केस की पैरवी की जबकि नारायण साईं के साथ कुल चार वकील पानीपत पहुंचे। पानीपत बार एसोसिएशन से वकील सुमित अग्रवाल ने उनकी पैरवी की। इस मामले में कुल 35 गवाह रखे गए हैं, जिनकी गवाही ट्रायल के दौरान होगी।
दूसरी बार पानीपत अदालत में पेश हुए नारायण साईं
मामले में फरवरी 2016 में नारायण साईं को पहले पानीपत कोर्ट में पेश किया जा चुका है। 16 सितंबर को उन्हें दोबारा पानीपत लाया गया है। जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने बताया कि इस मामले में नारायण साईं, कार्तिक और नीरज अलग-अलग जेल में बंद थे, इसलिए सभी को एक साथ अदालत में पेश करना पानीपत पुलिस के लिए कठिन हो रहा था। काफी मशक्कत के उन्हें पानीपत लाया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में फैसला भी आ जाएगा।
साईं को सूरत, बाकी दो को करनाल जेल भेजा
जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने बताया कि नारायण साईं सूरत जेल में बंद हैं, उन्हें वापस उसी जेल में भेजा गया है, जबकि शूटर कार्तिक जोधपुर और नीरज अहमदाबाद जेल में बंद थे, जिन्हें अब करनाल जेल में भेज दिया गया है। नारायण साईं की 20 सितंबर को होने वाली गवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी, जबकि कार्तिक, नीरज और निशांत घणघस को दोबारा कोर्ट मे पेश किया जा सकता है।
- किस पर क्या आरोप तय-
1. नारायण साईं पर षड्यंत्र रचने का आरोप तय-
अदालत में आसाराम के बेटे नारायण साईं पर षड्यंत्र रचने का आरोप तय हुआ है, उन पर आईपीसी 120-बी लगाई गई है। आरोप है कि साईं ने ही पूरी साजिश के तहत गैंगस्टरों से महेंद्र पर हमला कराया था।
2. शूटर कार्तिक पर 120-बी, 307, 452 पर आरोप तय-
शूटर कार्तिक पर 120-बी, 307 और 452 के आरोप तय हुए हैं। शूटर ने घर में घुसकर महेंद्र चावला पर दो फायर किए थे, एक गोली उनके कंधे पर लगी थी, जबकि दूसरी दीवार पर लगी थी। इस हमले में महेंद्र बच गए थे। आरोप है शूटर कार्तिक ने घर में घुसकर यह हमला किया था।
3. निशांत राज घणघस पर गवाही देने पर धमकाने के आरोप तय-
पानीपत निवासी निशांत राज घणघस पर अदालत में 120-बी, 195ए, 506 के आरोप तय हुए हैं। आरोप है कि उन्होंने महेंद्र को धमकाकर साईं के खिलाफ गवाही न देने का दबाव बनाया था और गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी थी।
4. नीरज पर भी षड़यंत्र रचने के आरोप तय-
चौथे गैंगस्टर नीरज पर भी षड्यंत्र रचने के आरोप तय हुए हैं। उन्हें भी 120-बी में रखा गया है। आरोप है कि नीरज ने नारायण साईं के साथ मिलकर पूरा षड्यंत्र रचा था।
- अनुयायियों की जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा-
नारायण साईं के अनुयायियों को जब पता चला कि वे पानीपत में पहुंच रहे है तो लघु सचिवालय में भीड़ एकत्रित होनी शुरू हो गई थी, जिसके बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीएसपी धर्मबीर खर्ब समेत सीआईए, सनौली थाना और शहर थाना पुलिस के जवानों को तैनात कर दिया। अदालत परिसर के गेट पर पुलिस के जवान तैनात होने से आम लोगों को दूसरे रास्ते से भेजा गया।
नारायण साईं का पीए था महेंद्र चावला-
महेंद्र चावला ने बताया कि साल 1996 में आसाराम से प्रभावित होकर उनके शिष्य बन गए थे। इसके बाद वह नारायण साईं के पीए रहे। उनसे गुरु दीक्षा लेकर शादी भी नहीं की थी, लेकिन दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद वर्ष 2015 में उन्होंने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं का साथ छोड़कर सत्य के साथ खड़े होने का निश्चय किया और आरोपियों को सजा दिलाने की ठान ली।