पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की लगातार छापेमारी के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के फैसले पर आईआरएस और आईएमए दो फाड़ हो गई है। आईआरएस की मनमानी से नाराज आईएमए ने आईआरएस को समर्थन नहीं दिया है। यही वजह रही कि रेडियोलॉजिस्ट की हड़ताल का शहर में खास प्रभाव नहीं पड़ा। शहर के लगभग सभी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे हुए। हालांकि, आईएमए ने आईआरएस के हड़ताल पर जाने के फैसले को सही बताया है।
स्वास्थ्य विभाग पर गलत कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए वीरवार को आईआरएस (इंडियन रेडियोलोजिस्ट सोसाइटी) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई है। लेकिन, उसको आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के फैसले से झटका लगा है। आईएमए ने हड़ताल को समर्थन देने से मना कर दिया। आईएमए का तर्क है कि हड़ताल पर जाने से पहले आईआरएस ने उनसे बात नहीं की, न ही उन्हें विश्वास में लिया। आईआरएस को उम्मीद के मुताबिक प्रशासन की तरफ से भी प्रतिक्रिया नहीं मिली। पूरा दिन सभी अस्पतालों में सामान्य रूप से अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे हुए।
विदित है कि आईआरएस ने राष्ट्रीय स्तर की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने का फैसला सुनाया था। आईआरएस का आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की आड़ में अस्पतालों में छापेमारी कर उन्हें परेशान कर रहा है। उन पर झूठे मुकदमें दर्ज करवा रहा है। निजी अस्पतालों में छापेमारी कर स्वास्थ्य विभाग उन्हें बेइज्जत कर रहा है। आईआरएस ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए वीरवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल बजाया था,लेकिन हड़ताल उम्मीद के मुताबिक कम प्रभावशाली रही। हालांकि आईएमए ने आईआरएस के हड़ताल पर जाने के फैसले को सही करार दिया है,लेकिन समर्थन देने से मना कर दिया।
आईएमए हड़ताल के मुद्दे पर आईआरएस को समर्थन नहीं दे रही है। आईआरएस ने हड़ताल पर जाने से पहले आईएमए को विश्वास में नहीं लिया। हालांकि, आईआरएस का हड़ताल पर जाने का फैसला सही है। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पताल में छापेमारी कर डॉक्टरों पर झूठा केस दर्ज कराया है। अस्पतालों के नाम खराब किए जा रहे है। इस मुद्दे पर आईएमए अपनी और आईआरएस अपनी लड़ाई लड़ रही है।
पंकज मुटनेजा, राज्य प्रधान, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन