पानीपत। अधिकारी नालों व सीवर की सफाई धरातल पर उतरकर नीयत के साथ करें तो पानी निकासी की समस्या पैदा नहीं होगी। मौजूदा हालात यह हैं कि प्रशासन हर बार दो महीने पहले बैठक कर पानी निकासी की तैयारी में लग जाता है , लेकिन नतीजा संतोषजनक नहीं रहता है। शहर ही नहीं गांवों में भी बारिश होने के साथ ही जलभराव हो जाता है। नाले, सीवर और ड्रेन बंद पड़े हैं। सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। यही हाल रहा तो इस बार भी जलभराव की स्थिति पैदा होगी।
अमर उजाला के अभियान अधूरी तैयारी, पड़ेगी भारी अभियान के अंतर्गत मंगलवार को किसान भवन में संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें किसान भवन के प्रधान सूरजभान रावल व अन्य लोग शामिल हुए। सूरजभान रावल बताया कि पानीपत में करीब 35 किलोमीटर लंबी यमुना लगती है। यमुना में तटबंध पर ठोकर लगाने का काम हर साल पूरा करने का दावा किया जाता है। इसके बाद भी यमुना का तटबंध टूट रहा है। बाढ़ के चलते किसानों की फसल हर साल बर्बाद हो जाती है। प्रशासन को इस बार पहले ही बाढ़ प्रबंधन की तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए। मामचंद और कर्ण सिंह ने बताया कि असंध रोड पुल के नीचे पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी पानी निकासी के प्रबंध नहीं किए गए हैं। यहां हल्की बारिश होते ही पानी जमा हो जाता है।
हरेंद्र राणा और शाहपुर गांव के सरपंच रणबीर ने बताया कि खंड व गांवों के स्तर पर भी पानी निकासी के व्यापक प्रबंध नहीं हैं। इसराना में हाईवे की सर्विस लेन पर पानी जमा हो जाता है। वहीं गांवों में भी पानी निकासी न होने से लोगों का घरों से बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाता है। अजमेर कुहाड़ और माेदी देशवाल ने बताया कि बापौली व सनौली क्षेत्र में पानी निकासी के प्रबंध नहीं हैं। ग्रामीणों व राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानीपत-हरिद्वार रोड पर सनौली खुर्द के अड्डे पर निकासी न होने पर पानी जमा रहता है। यहां हल्की बारिश में निकल पाना मुश्किल हो जाता है। संबंधित अधिकारियों को नालों, सीवर व ड्रेन की सफाई बेहतर तरीके से करानी चाहिए। प्रशासन धरातल पर जाकर मौका देखकर कमियों को दूर कराए तो जलभराव नहीं होगा।