पानीपत। विवाह की आयु 21 वर्ष होगी तो घरेंलू हिंसा के मामले कम होंगे। घरेलू हिंसा के ज्यादातर मामले में विवाह के एक से दो वर्ष के दौरान ही आते है और लड़कियों की उम्र 19 से 20 वर्ष के आसपास रहती है। विवाह के दौरान लड़की मानसिक तौर पर तैयार नहीं होती, नतीजा इन मामलों का विरोध करने में सक्षम नहीं होती। 21 वर्ष तक लड़की मानसिक रूप से अधिक सुदृढ़ होगी। ‘अमर उजाला’ संवाद कार्यक्रम के दौरान महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि कानून आने के बाद बाल विवाह के मामले बढ़ने की आशंका है, लेकिन विभाग तैयार है। टीम तैयार कर ली है, और कैंप लगाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद युवतियों को तीन वर्ष का समय मिलेगा। वह कॅरिअर बना सकती हैं। आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की ओर बढ़ेंगी। सरकार की तरफ से चलाया जा रहा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और मजबूत होगा।
उन्होंने बताया कि एक सर्वे से जानकारी मिली है कि 11वीं पास होते ही बेटियों के लिए अधिकतर माता-पिता रिश्ता देखना शुरू कर देते हैं। जब युवती 12वीं कक्षा में होती है तो उसका रिश्ता तय कर दिया जाता है। परीक्षा पास होते ही शादी कर दी जाती है लेकिन अब वह 12वीं के बाद उच्चतर शिक्षा भी ग्रहण कर सकेगी। उन्होंने कहा कि 21 वर्ष के बाद विवाह होने पर प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामलों में भी गिरावट आएगी। इस प्रकार के केस तभी सामने आते हैं, जब कम आयु में शादी कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि युवती 21 वर्ष तक मानसिक रूप से तैयार हो जाती है, इसलिए परिवार को संभालने की उसे बेहतर समझ होगी। उसके साथ गलत होगा तो आवाज उठा सकेगी।
एक साल में घरेलू हिंसा के 300 मामले, बाल विवाह की आईं 40 शिकायतें
अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि जनवरी 2021 से लेकर दिसंबर 2021 तक घरेलू हिंसा के करीब 300 मामले सामने आए हैं। जिनमें अधिकर मामलों में युवती की आयु 20 मिली। कम आयु में शादी होने पर घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। बाल विवाह की बात करें तो एक साल में 40 शिकायतें आईं, जिन्हें रुकवाया गया।