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Panipat News: औद्योगिक नगरी में बढ़े टीबी रोगी, पिछले साल 5210 की पहचान

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जिला नागरिक अस्पताल में स्थित टीबी जांच कार्यालय। संवाद
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पानीपत। औद्योगिक नगरी में टीबी के मरीज बढ़ गए हैं। पिछले पांच साल का आंकड़ा देखें तो करीब दो हजार मरीज बढ़ गए हैं। इसमें एक चौंकाने वाली बात और सामने आई है।
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वर्ष 2025 में पाए मरीजों में से 14 साल से कम उम्र के 364 बच्चे भी शामिल हैं। टीबी के ज्यादातर मरीज स्लम एरिया और झुग्गी बस्तियों में सामने आ रहे हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त भारत अभियान को इन क्षेत्रों में और तेज कर दिया है, इनके माध्यम से नियंत्रित करने की तैयारी है।
पानीपत में करीब 37 हजार उद्योग हैं और अकेले पूर्वांचल के करीब तीन लाख लोग रहते हैं। लोग धूम्रपान के साथ गुटका और दूसरे नशा भी करते हैं, ऐसे में लोगों में टीबी जैसी खतरनाक बीमारी घर करती जा रही है। टीबी मरीजों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है। पुरुष व महिलाओं के साथ बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2025 के आखिरी सप्ताह तक पिछले पांच साल की अपेक्षा टीबी के मरीज करीब दो हजार बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण लोगों का अत्यधिक धूम्रपान और शराब का सेवन करना और स्लम एरिया व झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ना है। यहां साफ-सफाई न के बराबर रहती है। यही बीमारियों के फैलने का बड़ा कारण बन रही हैं। टीबी मरीज इन क्षेत्रों से ज्यादा आ रहे हैं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. लाभ सिंह ने बताया कि जिले में टीम लगातार गांव-गांव में जाकर टीबी जांच कर रही है।
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विभाग का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जांच की जाए और उन्हें दवा के माध्यम से ठीक किया जा सके और जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सके। पिछले साल की अपेक्षा टीम ने ज्यादा काम किया है जिससे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
मरहम बॉक्स से मरीजों पर नजर : टीबी मरीजों पर नजर रखने के लिए विभाग ने मरहम बॉक्स की मदद लेनी शुरू की है, इसके माध्यम से विभाग को पता चल जाता है कि मरीज टीबी की दवा को बीच में तो नहीं छोड़ रहा है। यदि मरीज ऐसा करता है तो उसके को-ऑर्डिनेटर को तभी इसकी सूचना मिल जाती है और टीम वहां जाकर इसकी जांच भी करती है। बॉक्स के जरिये टीबी को बिगड़ने से रोकने में मदद मिल रही है।
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