पानीपत। औद्योगिक नगरी के ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) अस्पताल में गर्भवतियों की जान सांसत में है। अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू तक नहीं है। दोनों का काम पिछले छह महीने से निर्माणाधीन है। इसे जनवरी तक पूरा करने का दावा किया गया था।
आज दो महीने बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इनमें भी खासकर गर्भवतियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उनको इलाज के लिए एक बार ईएसआई में आना पड़ता है और अगले ही पल दूसरे अस्पताल में भेज दिया जाता है। ईएसआई अस्पताल में आज 19 साल बाद भी कोई सिजेरियन डिलीवरी नहीं हो पाई है।
औद्योगिक नगरी के ईएसआई अस्पताल में करीब आठ लाख लोग पंजीकृत हैं। यह जिला नागरिक अस्पताल से 2007 में अलग बना था। अब तक अस्पताल में पर्याप्त सुविधा नहीं हो पाई हैं। ईएसआई अस्पताल में लोगों को सुविधाओं के अभाव में परेशानी उठानी पड़ रही हैं।
उन्हें रेफरल होकर इलाज लेना पड़ रहा है या अस्पताल के पैनल से जुड़े निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। इसका बड़ा कारण ईएसआई अस्पताल में लोगों को ओटी या आईसीयू की सुविधा नहीं मिल पाना है। वहीं गर्भवतियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ और ओटी नहीं है। ऐसे में गर्भवतियों की जान सांसत में है। विभाग के अधिकारी गर्भवतियाें का निजी अस्पताल में प्रसव कराने की बात कहकर टाल देते हैं।
चिकित्सकों पर उठ चुके हैं सवाल : पिछले साल 11 मार्च को विधायक प्रमोद विज ने हरियाणा विधानसभा में ईएसआई अस्पताल से मरीज रेफर करने का मामला उठाया था। विधायक का कहना था कि साल 2023-24 में करीब साढ़े छह हजार मरीज रेफर किए गए हैं।
लगभग 36 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की है। विधायक का कहना था कि ईएसआई से मरीजों को पैनल से जुड़े निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा था। इसमें तीन चिकित्सकों की जांच की गई थी। संवाद