पानीपत। हरियाणा साहित्यिक उत्सव और पुस्तक मेले का पानीपत में शनिवार को शानदार आगाज हुआ। एसडी पीजी कॉलेज की मेजबानी में आयोजित कार्यक्रम पहले दिन ही सभ्यता और संस्कृति की अमिट छाप छोड़ता नजर आया। साहित्यकारों ने साहित्य को धरोहर बताया तो युवाओं ने पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेम पेश किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त नासिरा शर्मा रही। उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण मानव जाति पर संकट है। इसे बचाने का जिम्मा अब युवाओं के कंधों पर है। यही साहित्य का सरोकार है। यही इस प्रकार के साहित्यिक आयोजनों का लक्ष्य भी है।
एसडी पीजी कॉलेज में शनिवार को सात दिवसीय हरियाणा एक हरियाणवी एक थीम पर दूसरे हरियाणा साहित्यिक उत्सव एवं पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। इसमें मेजबान कॉलेज, नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया, हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा उर्दू अकादमी, हरियाणा ग्रंथ अकादमी, हरियाणा कला परिषद और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र शामिल हुए। इसमें नासिरा शर्मा ने कहा कि आदि काल से लेकर अब तक चाहे हमने कितनी ही तरक्की की है, लेकिन फिर भी हम पुस्तकों के बिना नहीं रह सकते। पुस्तकों के बिना इस संसार की परिकल्पना नहीं की जा सकती। यदि दुनिया में अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकों को समुंदर में फेंक दिया जाएं तो ये सारे समुंदर का पानी सोखने की ताकत रखती हैं। सही मायने में पुस्तक ही हमारी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा की कॉलेज ने इस आयोजन के माध्यम से एक क्रांति का सूत्रपात कर दिया है। बाकी जिम्मेदारी पाठकों को निभानी है।
वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभ लेखिका डॉ. क्षमा शर्मा ने नंदन और बाल पत्रिका से संबंधित 60 से अधिक पुस्तकों के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पुस्तकों से प्रेम रखना चाहिए। वे उनके जितने नजदीक जाएंगे, उनको उतना ही ज्ञान मिलेगा। कहानी लेखिका प्रत्यक्षा भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा की इंसान को बेहतरीन सोच किताबों से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा की यदि उनको किसी को दोस्त बनाना हो तो पुस्तकों को बनाएं। पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा की तकनीकी और प्रोद्यौगिकी से महरूम होना कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता है, परंतु इसे पुस्तकों की कीमत पर हासिल करना बेमानी है। वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि पुस्तकों में ज्ञान का असीमित भंडार है। पुस्तकों का ज्ञान एक दिन ही नहीं बल्कि हर समय काम आता है। जिला शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कॉलेज ने इस उत्सव को आयोजित कर जिले को पढ़ने और पढ़ाने की नई नसीहत दी है। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा की पुस्तक मेला जिले के प्रत्येक साहित्य और पुस्तक प्रेमी के लिए खुला है। इससे पहले कॉलेज में पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत किया गया। मंच संचालन डॉ. संगीता गुप्ता और संयोजक सूत्र राजीव रंजन ने किया। इस मौके पर कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रधान दिनेश गोयल, हरीवंश शर्मा, नेशनल बुक ट्रस्ट के सहायक संपादक द्विजेंद्र सिंह, एचसीटीए महासचिव डॉ. आरपी सैनी, डॉ. सुरेंद्र वर्मा, डॉ. राकेश गर्ग, डॉ. संतोष कुमारी, प्रो. सतीश अरोड़ा, प्रो. मयंक अरोड़ा, प्रो. इन्दु पुनिया, प्रो. यशोदा अग्रवाल, शशि मोहन गुप्ता, दीपक मित्तल मौजूद रहे।
कविता का सामाजिक सरोकार पर दी प्रस्तुति
शाम के सत्र का विषय कविता का सामाजिक सरोकार रहा। इसके अंतर्गत कविता और कवियों की समाज के प्रति जवाबदेही, दायित्वों और लिखने के कारणों पर विद्यार्थियोें के साथ मंथन किया गया। डॉ. प्रेम तिवारी हिंदी विभाग दयाल सिंह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, वरिष्ठ कवि इब्बार रब्बी, प्रोफेसर डॉ. बलि सिंह, डॉ. अंजना बख्शी, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, डॉ. द्वारिका प्रसाद, प्रो. राकेश तिवारी, डॉ. प्रमोद सिंह कथाकार, शंभू यादव, डॉ. महेंद्र सिंह, सत्यनारायण कवि शामिल रहे। उन्होंने कविता की बारीकियों, रचना शिल्प, इतिहास और इसके सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों को पसंद आई पुस्तकें
पुस्तक मेले में जब विद्यार्थियों से बात की गई तो उन्होंने इसको शिक्षा और साहित्य के लिए जरूरी बताया। छात्रा रंजना और दीप्ति ने बताया कि पुस्तकों में ही असली ज्ञान है। कॉलेज में पुस्तक मेला सराहनीय है। उनको कई विषयों की जानकारी यहीं पर मिल गई। अजय और दीपक ने बताया कि दूसरा पुस्तक मेला शानदार है।