पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट की माने तो पानीपत का पानी पीने लायक नहीं ‘गंदा जल’ है। स्वास्थ्य विभाग ने चार साल में जिन एक लाख 27 हजार स्थानों से पानी के सैंपल लिए, इनमें से 34,992 स्थानों का पानी पीने योग्य नहीं मिला है। पानी में क्लोरीन नहीं है जबकि बैक्टिरिया की मात्रा बहुत अधिक है। इसके सेवन से लोग बीमार पड़ रहे हैं।
शनिवार को दूषित पानी पीने से देशराज कॉलोनी में 15 लोग बीमार हो गए। यहां पर दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने देशराज कॉलोनी का दौरा किया और मरीजों को दवा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने जन स्वास्थ्य विभाग को भी इस संबंध में पत्र लिखा है।
इन क्षेत्रों का पानी अधिक खराब
जिले के काबड़ी, भाटिया कॉलोनी, गढ़ी सिकंदरपुर, बतरा कॉलोनी, गोपाल कॉलोनी, सौंदापुर, सौदापुर, जाटल रोड , कुलदीप नगर, अर्जुन नगर , काबड़ी फाटक, गांव मांडी, पलडी, डिडवाडी व समालखा क्षेत्र के पानी में कलोरीन की मात्रा कम मिली है। पानी की जांच में वे तमाम बैक्टीरिया मिले हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यही कारण है कि पानीपत में अकसर डायरिया व स्किन रोगों से लोग ग्रसित रहते हैं।
पिछले चार साल की आर्थोटोलिडाइन टेस्ट रिपोर्ट-
वर्ष सैंपल लिए नहीं मिला क्लोरीन
2018 23,988 8001
2019 26,905 8571
2020 24,479 8267
2021 27,410 10,153
कुल 1,02,782 34,992
बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट की रिपोर्ट
वर्ष सैंपल लिए मिला बैक्ट्रीरिया
2018 641 211
2019 582 177
2020 267 62
2021 373 70
केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने किया था नोटिस जारी
विभाग ने मार्च से जून तक शहर-गांवों के 45 स्थानों से 9710 नमूनों का ओटी किया था। इनमें से 3485 सैंपल फेल आए थे। 116 सैंपल बैक्ट्रोलॉजिकल टेस्ट के लिए भेजे थे, 15 फेल मिले थे। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने पेयजल आपूर्ति करने वाली एजेंसियों के नाम 29 जुलाई 2021 को नोटिस जारी किया है। आदेश था कि पानी में टीडीएस की मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
सीपीसीबी ने जांच में कहा था, पानीपत का पानी पीने योग्य नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2018 में सेक्टर 25 और सेक्टर 29 के पानी की जांच की थी। जांच में इंडस्ट्रियल एरिया के पानी में साइनाइड की 0.3 प्रतिशत मात्रा मिली थी। बोर्ड के अनुसार ये पानी स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। उस वक्त भी सीपीसीबी ने प्रशासन को निर्देश दिए थे कि वो इस संबंध में ठोस कदम उठाए।
इसलिए हो रहा है पानीपत का पानी खराब
पानीपत के विभिन्न हिस्सों के 600 से अधिक ब्लीचिंग हाउस हैं। 550 डाइंग यूनिट हैं। कुल 18 हजार से अधिक फैक्टरियां हैं। इनमें पानी का इस्तेमाल उत्पादन में होता है। उन पर आरोप है कि वे केमिकल युक्त पानी को सड़कों व भूजल में छोड़ देते हैं इसलिए जिले का पानी प्रदूषित हो रहा है। अब ये पीने योग्य नहीं है।
यह है टीडीएस
पानी में घुली चीजों को टीडीएस (कुल विघटित ठोस) कहते हैं। इसमें साल्ट, कैल्शियम, मैग्निशियम, पोटेशियम, सोडियम, कार्बोनेट, क्लोराइड्स हैं। ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक, मानव शरीर अधिकतम 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) टीडीएस सहन कर सकता है।
दूषित पेयजल से होने वाली बीमारियां
-उल्टी-दस्त, आंतों में संक्रमण।
-पीलिया, गले में इंफेक्शन।
-टायफाइड बुखार, स्किन एलर्जी।
-लगातार सेवन से किडनी में संक्रमण।
-नर्वस सिस्टम को नुकसान।
जन स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया है पत्र
पानी के सैंपल की रिपोर्ट आते ही जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है। टीडीएस की मात्रा अधिक होने से किडनी के रोगियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। बहुत अधिक बीमारियों में व्यक्ति घिर जाता है। जन स्वास्थ्य विभाग व पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की है। - डॉ. कर्मबीर सिंह चोपड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन