- जैन स्थानक में अरुण चंद्र मुनि महाराज ने सामयिक साधना के महत्व पर डाला प्रकाश
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। तेरा कैसे कर्ज चुकाऊं कितने अहसान गिनाऊं तू देकर भूलने वाले मैं हरदम हाथ फेलाऊं... भजन के साथ अग्रवाल मंडी के जैन स्थानक में श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा। चातुर्मास को पहुंचे गुरुदेव सुदर्शन लाल महाराज के शिष्य अरुण चंद्र मुनि महाराज ने प्रवचन में सामयिक साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।
अरुण मुनि ने कहा कि सामयिक वह क्रेन है जो हमें शोक की खाई से निकालकर आत्मा के ऊर्ध्वगामी मार्ग पर ले जाती है। यह साधना आत्मा के भीतर छिपे गुणों को प्रकट करती है। आत्मा का स्वभाव क्षमा है किंतु जब क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषाय उस पर चढ़ते हैं तो आत्म गुण दब जाते हैं। सामयिक इन आवरणों को हटाने की प्रक्रिया है। सामयिक को जीवन का प्रथम कार्य बनाएं । सुबह उठते ही पहला ध्यान भगवान का हो और पहला कार्य सामायिक। भगवान महावीर ने जीवन के चार विश्राम बताए है सामायिक, समाई, पोषध और संलेखना। इनमें सामयिक सर्वप्रथम और अनिवार्य विश्राम है जो आत्मा को समता की दिशा में स्थापित करता है।
अरुण मुनि अपने मुनि शिष्यों अभिषेक मुनि, अभिनंदन मुनि, अमृत मुनि महाराज सहित इस वर्ष चातुर्मास में जैन स्थानक में विराजमान हैं। प्रवचन में भाग लेने दिल्ली, होशियारपुर (पंजाब), सोनीपत, घरौंडा, मतलौड़ा, उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित हुए। वहीं राजा खेड़ी गांव स्थित जैन स्थानक में अरुण मुनि महाराज ने प्रवचन किए।