पानीपत। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता करनाल की टीम ने जिला उद्यान विभाग में सरकार की योजनाओं व सब्सिडी में भारी अनियमितता पकड़ी हैं। इसके साथ ही अधूरे आवेदनों पर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
निरीक्षण के वक्त कार्यालय में सभी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद मिले। यहां सरकार की योजनाओं को धरातल पर लागू करने में कई प्रकार की कमी मिली। मशरूम की सब्सिडी की फाइलों में भारी चूक पाई गई। टीम ने इसकी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी है।
मुख्यमंत्री उडनदस्ता के शेर सिंह, सुभाष चंद्र, चरण सिंह व प्रवीन की टीम शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे जिला उद्यान विभाग के कार्यालय में पहुंची। जिला उद्यान अधिकारी डाॅ. शार्दूल शंकर अपने कार्यालय में हाजिर मिले। टीम ने उनको औचक निरीक्षण के संबंध में अवगत कराया।
इसके बाद उनकी उपस्थिति में कार्यालय में नियुक्त कर्मचारियों की हाजिरी व किसानो को सब्सिडी से संबंधित योजना की फाइलों का अवलोकन किया। कई घंटे चले निरीक्षण की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी है। टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कार्यालय में 10 नियमित कर्मचारी व अधिकारी नियुक्त हैं। इनमें से एक अवकाश व नौ हाजिर पाए गए। अनुबंध के आधार पर आठ कर्मचारी हैं। इनमें छह कर्मचारी हाजिर पाए गए। एक कर्मचारी की खंड स्तर पर अस्थायी तौर पर ड्यूटी लगाई गई है और एक कर्मचारी सायं पांच बजे के बाद चौकीदारी के लिए आता है। यहां कोई कर्मचारी ड्यूटी से गैरहाजिर नहीं पाया गया।
मशरूम हट बनाने के स्थान की जानकारी तक नहीं ः एससीएसपी योजना के अंतर्गत मशरूम मद में प्राप्त आवेदनों की फाइलों का अवलोकन किया। इसमें आवेदन पत्र पर मशरूम हट बनाने के स्थान या जमीन के बारे में जानकारी नहीं है। इसमें भूमि पट्टे या खुद की होने के बारे में स्पष्ट लिखना चाहिए था। खंड बागवानी सलाहकार द्वारा आवेदन पत्र में पूरा ब्योरा नहीं भरा गया है। इसकी तारीख भी नहीं लिखी गई है। इसका फार्म भी पूरा नहीं भरा पाया गया। जमीन के ब्योरा में खसरा व किला नंबर का कॉलम खाली है। इसकी सही तरह से जांच भी नहीं की गई है। आधे अधूरे आवेदन फार्म पर लाभार्थियों को पूरा लाभ दिया गया है।
ये मिली अनियमितताएं ः प्लास्टिक टनल योजना के तहत कार्यालय को वर्ष 2024-25 के दौरान 157051 वर्ग मीटर क्षेत्र पर सब्सिसी दिए जाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इसके तहत वर्ष 2024-25 में 10 आवेदन प्राप्त हुए। इन सबके आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। इसमें 50,600 वर्ग मीटर क्षेत्र पर अनुदान राशि स्वीकृत हुई है। टीम ने लिखा कि इस योजना को लेकर लोगो में जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।