स्वीटी सांगवान
पानीपत। स्वास्थ्य विभाग भले ही एचआईवी को जांच और जागरूकता के माध्यम से खत्म करने का दावा कर रहा हो, लेकिन जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर एचआईवी जांच किट की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। नतीजा, एचआईवी जांच मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं तक सीमित होकर रह गई है।
स्थिति यह है कि पिछले करीब दो वर्षों से कई केंद्रों पर पर्याप्त किट उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। इस वजह से आम लोगों को जांच के लिए जिला नागरिक अस्पताल, पीजीआई रोहतक या एम्स दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में वर्तमान में 2510 एचआईवी संक्रमित मरीजों का उपचार चल रहा है। इनमें से अधिकांश मरीजों को जांच के लिए जिला नागरिक अस्पताल या बड़े चिकित्सा संस्थानों तक जाना पड़ा। रिकॉर्ड के मुताबिक, अंतिम बार 31 मई 2024 को एचआईवी जांच किट भेजी गई थीं। फिलहाल प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर करीब 500-500 किट ही उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से गर्भवती की जांच के लिए किया जा रहा है।
एचआईवी की पुष्टि के लिए सामान्यतः तीन चरणों में जांच की जाती है, लेकिन केंद्रों पर
केवल दो किट उपलब्ध होने के कारण तीसरी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को भी जिला नागरिक अस्पताल भेजा जा रहा है। इससे न केवल मरीजों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है, बल्कि समय और खर्च भी बढ़ रहा है। संवाद
लोग बोले-हर केंद्र पर किट होनी चाहिए
इसराना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने बताया कि उनके क्षेत्र के सीएचसी में एचआईवी जांच किट उपलब्ध नहीं थी, जिसके चलते उन्हें जिला मुख्यालय आना पड़ा। उन्होंने
बताया कि दो जांचों में रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि तीसरी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। उनका कहना है कि यह सुविधा सभी सीएचसी और पीएचसी स्तर पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मरीजों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
सीएचसी और पीएचसी पर सेंटर से किट उपलब्ध कराई जाती है। उन्हें जिला स्तर पर शामिल करने के लिए कागजी काम चल रहा है। जल्द ही उन्हें भी जिला स्तर पर शामिल कर किट उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी मरीजों को रिकॉर्ड जिला मुख्यालय पर रखा जाएगा।
-डॉ. लाभ सिंह, जिला टीबी उन्मूलन अधिकारी।