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Panipat News: महज तीन कॉलेजों में दी जा रही हिंदी की डिग्री

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- उपलब्ध 1960 सीटों में से केवल 115 पर करवाया जा रहा हिंदी पाठ्यक्रम
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। मातृभाषा हिंदी के प्रति विद्यार्थियों का लगाव एक बार फिर बढ़ने लगा है। वर्तमान में हिंदी सिर्फ संवाद की भाषा नहीं रही, बल्कि शिक्षा, साहित्य, सोशल मीडिया और तकनीक में भी मजबूत पहचान बना रही है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हिंदी की स्थिति पहले से काफी सशक्त हुई है।
इस सबके बावजूद स्नातकोत्तर में हिंदी का पाठ्यक्रम करवाने के लिए जिले के कॉलेजों में बढ़ावा नहीं दिया जा रहा। जिले में सरकारी और एडेड मिलाकर 14 कॉलेजों में से महज तीन में ही एमए हिंदी है। कुल सीटें 115 हैं। इनमें से राजकीय महिला महाविद्यालय मतलौडा की 40 सीटें महिलाओं के लिए हैं। अन्य 75 सीटें आईबी पीजी महाविद्यालय पानीपत और राजकीय महाविद्यालय इसराना की हैं। यह सभी सीटें हर साल भर जाती हैं। जिले के नौ स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 1960 सीटों में से केवल 135 सीट एमए हिंदी के लिए निर्धारित की गई है जिन्हें बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
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प्राथमिक स्कूलों में अब 90 मिनट हिंदी पढ़ते हैं विद्यार्थी
राजकीय स्कूलों में अब प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थी 90 मिनट तक हिंदी की पढ़ाई करते हैं। जबकि गणित व अंग्रेजी पढ़ाने के लिए 60-60 मिनट का समय निर्धारित है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र भारद्वाज का कहना है कि राजकीय विद्यालयों में बाल वाटिका से लेकर तीसरी कक्षा के लिए समय-सारिणी तय की है। निपुण हरियाणा मिशन के तहत यह बहुत महत्वपूर्ण है कि विद्यार्थियों को मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान में निपुण बनाने के लिए हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषयों में पर्याप्त शिक्षण समय मिलना आवश्यक है।


पांच वर्षों में दोगुना हुई हिंदी पढ़ने वालों की संख्या
पांच वर्षों के दौरान कॉलेज में हिंदी पढ़ने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हुई है। हालांकि पहले विद्यार्थियों में अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश सहित अन्य भाषाओं को सीखने का क्रेज देखने को मिलता था लेकिन अब विद्यार्थियों में हिंदी पढ़ने में अधिक दिलचस्पी है। जिले के महाविद्यालयों में 3000 से अधिक विद्यार्थी हिंदी विषय पढ़ रहे हैं। हालांकि हिंदी में यह सुधार निजी महाविद्यालय की बजाय सरकारी महाविद्यालय में ज्यादा है। कॉलेज प्राध्यापकों का कहना है कि पहले की अपेक्षा विद्यार्थियों में हिंदी पढ़ने की ज्यादा उत्सुकता है। विद्यार्थियों का हिंदी पढ़ने को लेकर रुझान व सम्मान बड़ा है। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर धर्मपाल ने बताया कि हिंदी माध्यम में दाखिले का रुझान काफी बढ़ा है। पिछले 8 साल के आंकड़ों के अनुसार करीब 80.79 फीसदी विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम से कोर्स किए हैं। नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा में एमए की पढ़ाई करने में लगे हैं।
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- इस बार 10वीं, 12वीं का परीक्षा परिणाम

विषय 10वीं 12वीं
अंग्रेजी 95.48 92.90
हिंदी 96.28 97.94
संस्कृत 99.49 99.68


दुनिया का हर छठा व्यक्ति बोलता है हिंदी : डॉक्टर गुप्ता
आर्य कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने एक शोध रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति हिंदी बोलता और समझता है। उनकी शोध रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार आज हिंदी विश्व की पहले स्थान पर बोली और समझी जाने वाली भाषा बन गई है। भाषा को वैश्विक स्तर पर गौरवपूर्ण स्थान दिलाने में विदेशी विद्वानों और विदेशी सरकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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