पानीपत। सर्दियों के मौसम में घना कोहरा रेल संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। दृश्यता कम होने के कारण ट्रेन संचालन, सिग्नल पहचान और समय पालन पर सीधा असर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कोहरे के दौरान सुरक्षित और सुचारू रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए कई विशेष तकनीकी और प्रशासनिक इंतजाम किए हैं। इन उपायों का उद्देश्य न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि लोको पायलट और यात्रियों की परेशानियों को भी कम करना है।
रेलवे द्वारा हाई-इंटेंसिटी एलईडी सिग्नलों की व्यवस्था की गई है। बल्ब आधारित सिग्नलों की तुलना में ये एलईडी सिग्नल अधिक चमकदार होते हैं और घने कोहरे में भी दूर से साफ दिखाई देते हैं। सिग्नलों की रोशनी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कम दृश्यता में भी लोको पायलट समय रहते संकेत पहचान सकें और ट्रेन की गति नियंत्रित कर सकें। हालांकि इन तमाम इंतजामों के बावजूद ठंड और कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। दृश्यता कम होने से ट्रेन की रफ्तार घटानी पड़ती है, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से पहुंचती हैं। प्लेटफार्म पर घंटों इंतजार कर रहे यात्रियों को ठंड में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वीरवार को दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस समेत 21 ट्रेनें देरी से आईं।
ये ट्रेनें आई देरी से
दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस पौने छह घंटे, पानीपत एमईएमयू डेढ़ घंटा और कुरुक्षेत्र दिल्ली एमईएमयू दो घंटे की देरी से आई। गोवा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस एक घंटा, सचखंड एक्सप्रेस सवा दो घंटे और शान ए पंजाब 40 मिनट की देरी से आई। जम्मू मेल एक घंटा, नेताजी एक्सप्रेस एक घंटा, जम्मू तवी एक्सप्रेस एक घंटा और झेलम एक्सप्रेस तीन घंटे की देरी से आई। हिमाचल एक्सप्रेस पौना घंटा, टाटानगर एक्सप्रेस 52 मिनट और दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस एक घंटे की देरी से आई। उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 50 मिनट, आम्रपाली एक्सप्रेस आधा घंटा और ऊंचाहार एक्सप्रेस डेढ़ घंटे की देरी से आई। दिल्ली पानीपत एमईएमयू 1.26 घंटे, फाजिल्का इंटरसिटी एक्सप्रेस पौना घंटा और नई दिल्ली कुरुक्षेत्र एमईएमयू सवा दो घंटे की देरी से आई। मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस साढे चार घंटे, कालका शताब्दी एक्सप्रेस डेढ़ घंटा और कुरुक्षेत्र जंक्शन गीता जयंती एक्सप्रेस एक घंटे की देरी से आई।
कोहरे के दौरान ट्रेनें भले ही कुछ देरी से चलें लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हाई-इंटेंसिटी एलईडी सिग्नल, नियमित पेट्रोलिंग, और लोको पायलटों के लिए विशेष इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। फिर भी कोहरा ज्यादा होने के कारण ट्रेनें देरी से आ रही हैं। यात्रियों को समय-समय पर स्टेशन पर उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से ट्रेनों की स्थिति की जानकारी दी जाती है।
-रमेश चंद्र, अधीक्षक रेलवे स्टेशन।
स्टेशन परिसर में धूप में बैठकर ट्रेनों का इंतजार करते यात्री। संवाद