समालखा। ऐतिहासिक गांव पट्टीकल्याणा आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं। जिस गांव के खादी आश्रम में कभी क्षेत्र का पहला जेबीटी कोर्स शुरू हुआ था और जिसने शिक्षा की अलख जगाई थी, आज उसी गांव के सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं हैं। यही हालात स्वास्थ्य सेवाओं के भी हैं।
गांव में तीन सरकारी स्कूल हैं। इनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, लड़कियों का 10वीं तक का स्कूल और एक प्राथमिक स्कूल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के भवन को चार साल से जर्जर घोषित कर गिरा दिया गया था लेकिन आज तक नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू नहीं हो सका। एक-एक कमरे में 50-50 बच्चों को बैठाया जाता है। बारिश में छतें टपकने लगती हैं। संवाद
पीएचसी का भवन जर्जर, एक हिस्से पर रसूखदार का कब्जा
पट्टीकल्याणा में महावटी रोड पर करीब चार एकड़ भूमि में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बना हुआ है। सरकारी कागजों में यह आसपास के आठ गांवों के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालती है, लेकिन हकीकत यह है कि यह खुद के गांव के मरीजों का इलाज करने में भी असमर्थ है। अस्पताल परिसर के एक हिस्से पर कुछ रसूखदार लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। पीएचसी में न तो समय पर डॉक्टर मिलते हैं और न ही जरूरी दवा उपलब्ध होती हैं। इसकी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और चारों तरफ कांग्रेस घास व गंदगी का अंबार लगा रहता है।
स्कूल की इमारत गिराए चार साल हो गए, लेकिन नई नहीं बनी। अधिकारियों से कई बार मिले पर कोई सुनवाई नहीं हुई। बच्चों का भविष्य अंधकार में है। -नरेश।
बारिश में स्कूल नरक बन जाता है। छतें टपकती हैं और एक कमरे में 50 बच्चों को बैठना पड़ता है। ऐसे माहौल में बच्चे कैसे पढ़ेंगे और देश का नाम कैसे रोशन करेंगे? -हरिओम
चार एकड़ की पीएचसी है, लेकिन न तो वहां कोई डॉक्टर बैठता है और न ही पट्टी करने की दवाई मिलती है। इमरजेंसी में समालखा भागना पड़ता है। -विजय
अस्पताल परिसर के चारों ओर गंदगी और कांग्रेस घास उगी हुई है। साइड की जमीन पर लोगों के कब्जे हैं। प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा। बीमारियां बढ़ रही हैं। -वेद
आठ गांवों को जोड़ने वाली इस पीएचसी की बिल्डिंग खुद बीमार है। खिड़की-दरवाजे टूटे हुए हैं। सरकार को तुरंत यहां स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए और नई दवाइयां भिजवानी चाहिए। -अनिल
इंसानों के अस्पताल के साथ-साथ पशु अस्पताल की हालत भी दयनीय है। गांव में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन करते हैं, लेकिन जानवरों के बीमार होने पर कोई सरकारी डॉक्टर या दवा नहीं मिलती। -पवन
पट्टीकल्याणा गांव में आरोग्य केंद्र। संवाद- फोटो : samvad