अध्ययन के मुताबिक, कुल 4828 मरीजों में 70 फीसदी ग्रामीण और 30 फीसदी शहरी क्षेत्र से हैं। इसके साथ ही 67 फीसदी पुरुष और 33 फीसदी महिलाएं संक्रमित मिलीं। 76 फीसदी में क्रॉनिक (पुराना) हेपेटाइटिस-बी मिला, जो निष्क्रिय अवस्था में है, 14 फीसदी में संक्रमण सक्रिय पाया गया और 10 फीसदी में एक्यूट (तीव्र) हेपेटाइटिस-बी मिला। 14 फीसदी सक्रिय क्रॉनिक मरीजों में से 2.85 फीसदी ने इलाज बीच में ही छोड़ दिया।
71 मरीजों में लीवर सिरोसिस और 10 में कैंसर की स्थिति पाई गई
इलाज के दौरान 4828 में से 71 मरीजों में लीवर सिरोसिस की स्थिति पाई गई। इनमें से 10 मरीजों में कैंसर पाया गया। सिरोसिस की स्थिति तक पहुंचे इन 71 मरीजों में से 52 पुरुष और 18 महिलाएं रहीं।
हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग से हेपेटाइटिस-बी रोकने में सहायता मिलेगी। जल्द डायग्नोसिस यानी संक्रमण का जल्द पता लगने से हेपेटाइटिस-बी के मरीजों को लीवर सिरोसिस और कैंसर जैसी गंभीर स्थित में पहुंचने से बचाया जाना संभव होगा। - डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, हेड, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस रोहतक