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हनुमान जन्मोत्सव खास, करें राम नाम का जाप, पूरे होंगे काम

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पानीपत। चैत्र मास की पूर्णिमा (16 अप्रैल) को मनाए जाने वाला हनुमान जन्मोत्सव इस बार खास होगा। कारण कि इस दिन न सिर्फ शनिवार पड़ रहा है, बल्कि रवि और हर्षण योग बन रहा है। साथ ही हस्त और चित्रा नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। माना जा रहा है कि इस दिन महाबली हनुमान की पूजा विशेष फलदायी होती है। साथ ही राम नाम की 108 माला जपने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के अनुसार, सनातन धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान को संकट मोचक माना गया है। साथ ही शनिवार और मंगलवार का दिन बजरंगबली हनुमान को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि श्री हनुमान जी का नाम लेते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं और भक्त को किसी बात का भय नहीं सताता है। उनके नाम मात्र से आसुरी शक्तियां गायब हो जाती हैं। तभी तो देश भर में हनुमान जन्मोत्सव हर साल धूमधाम से मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव पर इस साल रवि और हर्षण योग बन रहा है। साथ ही हस्त और चित्रा नक्षत्र का संयोग रहेगा। हनुमान जन्मोत्सव पर सुबह 5:55 से 8:40 बजे तक रवि और हर्षण योग रहेगा। हस्त नक्षत्र सुबह 8:40 बजे तक रहेगा, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। हर्षना योग 16 अप्रैल की रात 02.45 बजे तक रहेगा। ऐसा माना जाता है कि रवि योग में किया गया कोई भी कार्य जल्द शुभ फल देता है।
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क्या है रवि और हर्षण योग
सूर्य की पवित्र ऊर्जा से भरपूर होने से इस योग में किया गया कार्य अनिष्ट की आशंका को नष्ट कर शुभ फल प्रदान करता है। वहीं हर्षण योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शास्त्रों में पारंगत और भाग्यशाली होता है।
हनुमान जी की पूजा में इन रंगों से करें परहेज
श्री बजरंग बली का प्रिय रंग लाल है। ऐसे में पूजा के दौरान उनकी पसंद का ध्यान रखें। कहने का तात्पर्य है कि श्री हनुमान जी को लाल रंग के फूल, कपड़े आदि अर्पित करें। श्री हनुमान जी की पूजा काले या सफेद रंग के कपड़े पहनकर न करें। ऐसा करने पर आपकी पूजा का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हनुमान जी की पूजा में सदैव लाल और पीले रंग के कपड़ों का ही प्रयोग करें।
ऐसे में न करें हनुमान का ध्यान
श्री बजरंग बली काफी शांतप्रिय देवता माने जाते हैं, इसलिए उनकी साधना बड़े ही शांत मन से करनी चाहिए। यदि आपका मन अशांत है या फिर आपको किसी बात पर क्रोध आ रहा है, तो ऐसे में हनुमान जी की पूजा न करें। अशांत मन से की गई पूजा से हनुमान जी प्रसन्न नहीं होते हैं। साथ ही हनुमत पूजन के दौरान गलत विचारों की ओर अपना मन न भटकने दें।
न चढ़ाएं चरणामृत
बहुत कम ही लोगों को इस बात का ज्ञान है कि हनुमान जी की पूजा में चरणामृत का प्रयोग नहीं किया जाता है। साथ ही श्री बजरंग बली की खंडित अथवा टूटी मूर्ति की पूजा करना भी वर्जित है। मांस-मदिरा का सेवन करने के पश्चात भी न तो हनुमान मंदिर जाएं और न ही उनकी पूजा करें।
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