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Panipat News: दादी-नानी बनी बच्चों की शिक्षक, अनुभव से सीख रहे नौनिहाल

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पानीपत। शीतकालीन अवकाश एक जनवरी से शुरू हो चुके हैं और अब जिले के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे घर बैठे सीखने के नए अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने निपुण हरियाणा मिशन और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विशेष अनुभव आधारित गृहकार्य तैयार किया है। जिले के 243 प्राइमरी स्कूलों में लागू इस नवाचार में लेखन और रटने की बजाय व्यावहारिक ज्ञान और पारिवारिक सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है।
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इस गृहकार्य की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों की पढ़ाई में दादी, नानी, नाना सहित परिवार के वरिष्ठ सदस्य शिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। बच्चे अपने बुजुर्गों से उनके जीवन अनुभव, परंपराएं, खान-पान, लोककथाएं और सामाजिक रीति-रिवाजों के बारे में सीख रहे हैं। इन गतिविधियों को बच्चे बातचीत, चित्र, फोटो, वीडियो और ऑडियो के माध्यम से साझा कर रहे हैं, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता भी विकसित हो रही है।
शिक्षक प्रतिदिन शिक्षक-अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप में अगले दिन की गतिविधियों के निर्देश साझा कर रहे हैं। अभिभावक बच्चों के साथ मिलकर गतिविधियां पूरी करवा रहे हैं और पूरा किया गया गृहकार्य उसी ग्रुप में भेजा जा रहा है। इससे शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद बना हुआ है। रात्रि समय में बच्चों को पंचतंत्र, तेनालीराम और अन्य शिक्षाप्रद कहानियां सुनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सही-गलत की समझ विकसित हो। इसके साथ ही बच्चों को गीत, पहेलियां, लोककथाएं, पारंपरिक व्यंजन, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे विषयों से जोड़ा जा रहा है।
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गृहकार्य को खेल-खेल में सीखने की अवधारणा पर तैयार किया गया है। गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अनुमान, विश्लेषण, कहानी कहना, संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित किया जा रहा है। इससे बच्चों का शब्दकोश भी समृद्ध हो रहा है। अभिभावकों से बच्चों में सुबह जल्दी उठने, ध्यान व मेडिटेशन करने, सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में भाग लेने और पर्यावरण संरक्षण की आदत डालने का आग्रह किया गया है। बच्चों को पौधारोपण, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता का महत्व भी सिखाया जा रहा है। बालवाटिका-3 के बच्चों के लिए 15 दिनों का विशेष गृहकार्य तैयार किया गया है, जिसमें 100 अंक निर्धारित हैं। गतिविधियों में पत्तियों की छाप बनाना, चुंबक से खेलना, पानी में घुलने-न घुलने वाली वस्तुओं की पहचान, आकृतियों की खोज, गिनती, फिंगर पेंटिंग, माचिस की तीलियों से आकृतियां बनाना और मौसम व वस्त्रों की पहचान शामिल है।

वर्जन-
यह अनुभव आधारित गृहकार्य बच्चों को सीखने से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। परिवार और विद्यालय के संयुक्त प्रयास से बच्चे न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि उनमें जीवन कौशल, संस्कार और व्यावहारिक समझ भी विकसित होगी।
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- सुभाष चंद्र भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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