- गर्भवती किशोरी थानों के चक्कर काटने के बाद पहुंची बाल विवाह निषेध अधिकारी के पास
- किशोरी को नागरिक अस्पताल में कराया भर्ती, जांच शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। माता-पिता की मौत के बाद दादी ने 15 साल की उम्र में ही पोती का निकाह कर दिया। बिचौलिए ने किसी दूसरे युवक का फोटो दिखाकर किशोरी का निकाह दिव्यांग से करा दिया। उसे बंधक बनाकर रखा गया। जब किशोरी ने दादी को यह बात बताई तो उनकी सदमे से मौत हो गई। किशोरी नौ माह की गर्भवती है और इंसाफ के लिए थाना-चौकियों के चक्कर काट रही है। अब मामला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी तक पहुंचा तो किशोरी को सोमवार को अस्पताल में भर्ती करा मामले की जांच शुरू कर दी है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी किशोरी अपने ताऊ के बेटे के साथ महिला संरक्षण और बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय पहुंची। किशोरी ने बताया कि वह दो बहनें हैं। उनकी माता की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी। कोरोना से पहले उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद वह बुजुर्ग दादी के साथ रहने लगी। अक्टूबर 2024 में दादी ने अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए किशोरी का 15 साल की उम्र में निकाह कर दिया। मार्च 2025 में किशोरी की दादी की तबीयत खराब हुई तो वह दादी से मिलने पहुंची और आपबीती बताई। उस समय किशोरी तीन माह की गर्भवती थी। आपबीती सुनकर दादी की मौत हो गई। किशोरी ससुराल न जाकर ताऊ के घर चली गई।
डॉक्टरों ने इलाज से किया इन्कार
गर्भवती होने के बाद किशोरी शहर के तीन डॉक्टरों के पास उपचार के लिए पहुंची। लेकिन चिकित्सकों ने उपचार नहीं किया और न ही इसकी सूचना किसी संबंधित अधिकारी को दी। इसके बाद वह शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची तो थाने पर तैनात पुलिस ने भी बिना कार्रवाई उसे वहां से भगा दिया। सोमवार को किसी तरह से किशोरी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय पहुंच गई। जहां से इस मामले को महिला संरक्षण एवं बाल विवाह अधिकारी को सौंपा गया।
किशोरी उनके पास आई थी। वह आठ-नौ माह की गर्भवती है। किशोरी को इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कानूनी कार्रवाई होगी।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी