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Panipat News: चातुर्मास के लिए जैन संतों का भव्य मंगल प्रवेश

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चातुर्मास पर साधु-साध्वी भगवंत के प्रवेश पर कार्यक्रम में उप​स्थित लोग। स्रोत : सोशल मीडिया - फोटो : Self
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माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। चातुर्मास के शुभारंभ पर बुधवार को जैन समाज में श्रद्धा और उल्लास का वातावरण रहा। हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में साधु-साध्वी भगवंतों का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पानीपत जिले में भी विभिन्न स्थानों पर संतों के आगमन पर श्रद्धालुओं ने शोभायात्राएं निकालीं और पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
मतलौडा में संत नरेंद्र मुनि महाराज आदि ठाणा का मंगल प्रवेश हुआ, जबकि गन्नौर में प्रातःकाल सुनील मुनि महाराज आदि ठाणा का भव्य स्वागत किया गया। वहीं गुरु सुदर्शन संघ के सिरमौर नरेश चंद्र महाराज के मंगल प्रवेश से भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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चातुर्मास के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना, धर्म आराधना और सेवा कार्यों में भाग लिया। विभिन्न जैन एवं सामाजिक संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था भी की गई।
विभिन्न क्षेत्रों में करेंगे चातुर्मास : इस वर्ष जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानकवासी जैन परंपरा के संतों और महासाध्वियों के चातुर्मास की घोषणाएं की गई हैं। गांधी मंडी में डॉ. राजेश मुनि महाराज एवं सेवाभावी राजेंद्र मुनि महाराज चातुर्मास करेंगे। उनके साथ साध्वी मंडल से महासाध्वी समता महाराज तथा साध्वी भविका महाराज भी रहेंगी।
अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि महाराज, परिषद विजेता विशाल मुनि महाराज, नरेंद्र मुनि महाराज, विकास गुरु महाराज, आनंद मुनि महाराज तथा पवित्र मुनि महाराज का चातुर्मास होगा। एसएस जैन महासभा हरियाणा के प्रदेश महासचिव सुभाष जैन ने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम, साधना और समाज में एकता व सद्भाव का संदेश देता है।
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राजाखेड़ी में मां और दो बेटियां करेंगी वर्षायोग
राजाखेड़ी में इस बार पारिवारिक वैराग्य और दीक्षा की अनूठी मिसाल देखने को मिलेगी। यहां ज्ञाननिधि महासाध्वी रमनश्री महाराज, साध्वी रचनाश्री महाराज, साध्वी रंजनश्री महाराज तथा साध्वी समताश्री महाराज का वर्षायोग होगा। इनमें ज्ञाननिधि महासाध्वी रमनश्री महाराज, साध्वी रचनाश्री महाराज और साध्वी रंजनश्री महाराज आपस में मां और बेटियां हैं। तीनों ने एक साथ जैन दीक्षा ग्रहण की थी, जो जैन समाज में त्याग और वैराग्य का प्रेरक उदाहरण माना जाता है। इसके अलावा समालखा में धर्म मुनि महाराज, चिराग मुनि महाराज, चंद्रेश मुनि महाराज तथा केशव मुनि महाराज का भी मंगल प्रवेश हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत कर चातुर्मास की शुरुआत की।
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