गांवों में पेयजल सप्लाई की जिम्मेदारी अब पूरी तरह से ग्राम पंचायताें को
ही संभालनी होगी। इसके बदले में जन स्वास्थ्य विभाग ग्राम पंचायत को प्रति
ट्यूबवेल के हिसाब से खर्च देगा।
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के
लिए ग्राम पंचायतों को इसके बारे में अवगत कराया जा रहा है।
जन
स्वास्थ्य विभाग लगातार नीचे गिरते भूमिगत जल स्तर को लेकर गंभीर है।
भूमिगत जल स्तर को बचाने के लिए कई तरह की महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की
गई है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में लगे पेयजल सप्लाई के ट्यूबवेलों के रखरखाव
की जिम्मेदारी पूर्णत: पंचायतों को ही संभालनी होगी।
जिला में हैं 167 गांव
इस
समय जिला में 167 गांव हैं। वर्तमान में इनमें से 65 गांवों में ही
पंचायतों ने ट्यूबवेल की जिम्मेदारी ले रखी है। विभाग ने हर गांव को
जिम्मेदारी सौंपने की योजना बनाई है। यह जिम्मेदारी गर्मियां शुरू होने से
पहले ही दी जाएगी। विभागीय अधिकारियों का मानना है गांवों में पेयजल का
अंधाधुंध दोहन हो रहा है। ट्यूबवेलों के बंद होने या चलने का कोई समय नहीं
है। सरकारी कर्मचारी काम में कोताही बरतते हैं। कई गांवों में तो कोई भी
आकर किसी भी समय ट्यूबवेल चला लेता है। इससे पेयजल बहुत ज्यादा मात्रा में
बहता रहता है।
गंभीरता से निभानी होगी जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत
द्वारा जिसे भी ट्यूबवेलों को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसे गंभीर
रहना होगा। ट्यूबवेलों के चलाने का शेड्यूल बनाया जाएगा। लापरवाही होेने
पर ज्यादा विभागीय पचड़ों में भी नहीं पड़ना होगा। इन सब बातों को देखते
हुए विभाग ने यह कदम उठाया है।
यह मिलेगा अनुदान
ट्यूबवेलों की
देखभाल के बदले में विभाग पंचायतों का खर्च वहन करेगा। किसी भी गांव में एक
ट्यूबवेल पर 11 हजार प्रति माह, दो पर 15 हजार, तीन पर 20 हजार, चार पर 24
हजार, पांच पर 29 हजार व छह ट्यूबवेलों पर 33 हजार रुपये दिए जाएंगे।