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Panipat News: सरकार नहीं ले रही आशाकर्मियों की सुध

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कुरुक्षेत्र। हाल ही में केंद्र सरकार लोक सभा में महिला आरक्षण बिल पास करने के नाम पर गुमराह कर रही है, दूसरी और प्रदेश की हजारों आशाकर्मी पिछले 45 दिन से सड़कों पर बैठी है और सरकार आशाकर्मियों की सुध तक नहीं ले रही है। ये आरोप आशा वर्कर यूनियन जिला प्रधान पिंकी ने लगाए। वे वीरवार को आशाकर्मियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर जारी धरने को संबोधित कर रही थी।
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जिला प्रधान पिंकी और सीटू जिला सचिव अनिल कुमार ने कहा कि एक तरफ संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात केंद्र सरकार कर रही है और दूसरी तरफ महिलाओं को रोड पर उतरने पर मजबूर किया हुआ है। महिला आरक्षण नियम एक तरह का जुमला है, क्योंकि जब तक जनगणना नहीं होती तब तक महिला आरक्षण लागू नहीं होता।
आशाकर्मी जब जन संवाद कार्यक्रम में अपनी बात रखने जाती हैं तो उनको गुमराह कर दिया जाता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 के बाद आशाओं का मानदेय एक पैसा भी नहीं बढ़ाया गया हैं जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। इससे आशाकर्मियों का रोष गहराता जा रहा है और सरकार उनकी मांग पूरा करने की बजाए दबाव बनाने पर उतरी हुई है। आशाकर्मियों को घरों में ही नजरबंद कर दिया जाता है जैसे कोई अपराधी हो।
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आशा वर्कर यूनियन की जिला कैशियर उषा, सीटू जिला उपप्रधान सुनील रत्न, ने बताया कि सरकार की हठधर्मिता से आम जनता को होने वाले नुकसान से प्रदेश सरकार को कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा लेकिन आशा वर्कर भी अपनी मांगों से पीछे हटने वाली नहीं है। जब तक आशा वर्करों को पक्के कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता या न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए मासिक नहीं किया जाता तब तक आशाकर्मी डटी रहेंगी। इसी के साथ आशाओं की रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष की जाए। इस दौरान आशा वर्कर यूनियन जिला कैशियर उषा, केलापती, सुषमा, निर्मला खेड़ी राम नगर, कमलेश, सुमन, आदि ने संबोधित किया।
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