पानीपत। पानीपत के निजामपुर गांव के किसान बिजेंद्र सिंह की जलाकर मार डालने के मामले में राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पुलिस, प्रशासन और सत्ता तीनों को कठघरे में खड़ा किया है। उनका आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में देरी से मुकदमा दर्ज किया और ट्राइडेंट होल्डिंग कॉर्पोरेशन कंपनी के निदेशक को मुकदमे में बाहर रखा।
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला इस पूरे मामले के लिए वीरवार को स्काईलार्क रिसोर्ट में मीडिया से रुबरू हुए। उन्होंने किसान को दिल्ली ले जाते समय परिजनों का वीडियो भी दिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के इतिहास में 75 वर्षों में ऐसा अपराध नहीं हुआ, जाे अब पानीपत में हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा सरकार के संरक्षण और मिलीभगत में हुआ है। सुरजेवाला ने प्रदेश सरकार से मीडिया के माध्यम से सात प्रश्न पूछे हैं। राज्यसभा सांसद ने कहा कि प्रशासन ने सत्ता पक्ष के दबाव में तीन भाइयों की दो एकड़ जमीन के मामले में फैसला सुनाने में जल्दी की और कंपनी के हक में फैसला सुनाया। तीसरा बड़ा प्रश्न सत्तापक्ष पर कंपनी के निदेशक को सह देने के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता का आरोप है कि कंपनी के निदेशक सुमित कुमार नरवर भाजपा की 2014 में सरकार बनने के बाद उभरकर सामने आए।
बॉक्स
प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सुमित कुमार नरवर की कंपनी ट्राइडेंट पार्क टाउन प्राइवेट लिमिटेड का विवाद निजामपुर गांव किसान बिजेंद्र कुमार के साथ चल रहा था। पानीपत प्रशासन ने भी पार्टीशन के दावे में बहुत तीव्र गति से कार्रवाई कर एक किसान के हकों को खारिज कर सुमित कुमार नरवर की कंपनी के हक में फैसला दे दिया। पानीपत प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यह कहने की जरूरत नहीं कि प्रशासन हरियाणा के सचिवालय में बैठे सफेदपोशों के दबाव में काम कर रहा है। जबकि किसान परिवार का कहना है कि पूरा मामला हाईकोर्ट में है। निजामपुर के किसान बिजेंद्र कुमार पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर कंपनी के बाउंसरों ने जिंदा जला दिया गया। बिजेंद्र अपनी जमीन न छीनने को लेकर बिलखता रहा। कंपनी के लोगों ने उसकी एक नहीं सुनी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजेंद्र की जलाकर हत्या करना सुनियोजित है। बिजेंद्र को परिवार के लोग दिल्ली के अस्पताल में ले जा रहे थे तो उसने कैमरे के सामने कंपनी के कारिंदों द्वारा जिंदा आग लगाकर जलाने की बात कही। सरकार प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से पुलिस ने दो जून को कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। एफआईआर तीन जून को 12:46 पर की। परिजनों काे पुलिस थाने पर धरना तक देना पड़ा।
बॉक्स
एफआईआर में नहीं लिखा हत्यारोपी का नाम
रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि किसान की हत्या करने के आरोपी का नाम नहीं लिखा। किसान की जलाकर हत्या करने ‘शक’ लिख दिया। कंपनी का नाम ही गलत लिख दिया गया। कंपनी के असल मालिक सुमित कुमार नरवर या कंपनी के निदेशकों का नाम ही नहीं लिखा। किसान को जलाकर मारने का कारण ही नहीं लिखा। यह सब मामला रफा-दफा करने के लिए छोड़ी गई है।
बॉक्स
मुख्यमंत्री नायब सैनी से ये सात प्रश्न
- सुमित कुमार नरवर कौन हैं व उनके भाजपा सरकार से क्या संबंध हैं?
-क्या जमीन के मालिक किसानों को अब बिल्डर लॉबी को जमीन न देने पर जलाकर कत्ल कर दिया जाएगा? क्या किसी कंपनी को विवादित ज़मीन के मालिक गरीब किसान को जलाकर मारने का अधिकार है?
- किसान बिजेंद्र की हत्या दो जून को हुई तो भाजपा सरकार प्रशासन व पुलिस द्वारा एफआईआर तीन जून को 12:46 पर क्यों दर्ज की गई। किसान बिजेंद्र का आखिरी वीडियो परिवार के पास उपलब्ध है तो फिर पुलिस इस पर संज्ञान क्यों नहीं ले रही?
- पुलिस ने कंपनी के मालिकों व निदेशकों पर कत्ल का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया? क्या भाजपा सरकार असरदार कंपनी को नहीं बचा रही?
-क्या मुख्यमंत्री नायब सैनी कंपनी के लाइसेंस को इसी आधार पर खारिज करेंगे और जिम्मेदारी लेंगे? क्या मुख्यमंत्री सुमित कुमार नरवर की हरियाणा के पंचकूला, गुरुग्राम और फरीदाबाद में चल रही सभी कंपनियों की जांच करवाएंगे?
- क्या मुख्यमंत्री नायब सैनी किसान बिजेंद्र की हत्या की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराएंगे? क्योंकि तथ्यों से सरकार व प्रशासन की मिलीभगत साफ है।
- क्या मुख्यमंत्री नायब सैनी गरीब किसान बिजेंद्र के परिवार को अंतरिम राहत के तौर पर दो करोड़ रुपये का मुआवजा देंगे।