पानीपत। श्री प्रेम मंदिर में श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतर्गत वीरवार को छठा दिन रहा।
कथा व्यास अतुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान की दयालुता असीम है। प्रभु अपने भक्त और अभक्त यानि नास्तिक पर समान रूप से कृपा करते हैं। यदि महात्मा विदुर पर गोबिंद की कृपा रही तो वही कृपा करते हुए विषपान कराने आई पूतना को अपना धाम दिया। ऐसा ही व्यवहार गोबिंद ने शिशुपाल के साथ किया।
उन्होंने कहा कि शिशुपाल के अपशब्द को सहन करते हुए बार-बार समझाने व उसका हृदय परिवर्तन करने का भरसक प्रयास किया। प्रभु का स्वभाव ही ऐसा है कि कोई कितना ही बड़ा पापी या अधर्मी हो उसे अपना धाम दे देते हैं। ईश्वर के अतिरिक्त कहीं कुछ नहीं।
समस्त सृष्टि ईश्वर रूप है। वे कण कण में है तथा कण कण उनमें। इसलिए ईश्वर प्राप्ति चाहे हो तो अच्छा नहीं तो उसकी अनुभूति होने के प्रयास तो करते रहना चाहिए जो फलेच्छा रहित सेवा कार्यों से, सिमरन स्वाध्याय आदि से सम्भव है। इसके फलस्वरूप हम तमोगुणी प्रवृत्ति से रजोगुणी और रजोगुणी से सतोगुणी प्रवृत्ति में प्रवेश कर सकते हैं। अनुकूल व प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं के स्वभाव को धैर्य, सहनशीलता सद आचरण में लाना चाहिए। सम स्थिति में रहने वाले व्यक्ति किसी को सुखी देखकर ईर्ष्या नहीं करते और न ही दुख देखकर प्रसन्न होते हैं।
मंदिर की परमाध्यक्ष श्रीश्री 108 कांता देवी महाराज ने कहा कि यह दिव्य कथा संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है। वर्तमान में यदि हर घर में परस्पर सद्भावना हो आदर सत्कार हो, अर्थों उपार्जन धर्म निहित तो निसंदेह शांति प्रेम भक्ति का वास देखने को मिल सकता है।
शुक्रवार को दोपहर को भंडारा प्रसाद वितरण किया जाएगा। इस मौके पर परमवीर धींगड़ा, सुनील मिगलानी, हरीश बजाज, सुरेश अरोड़ा, अनिल नंदवानी, तिलक अग्घी, चंद्र प्रकाश वधवा, अनिल दुर्गा, सचिन मिगलानी आदि माैजूद रहे।