संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी में चल रहे चातुर्मास में आगम ज्ञाता अरुण चंद्र मुनि महाराज ने आत्मा की अनुभूति पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि शरीर और आत्मा के भेद को पहचानने का जीवंत अनुभव है। शरीर की निष्क्रियता और आत्मा की जागरूकता एक वैज्ञानिक, आत्म-शोध की पद्धति है जो हजारों वर्षों से जैन परंपरा में जीवित है। अतीत से चिपके रहने वाले कभी भी वर्तमान की ऊर्जा को नहीं पकड़ सकते। आत्मा के स्वरूप की पहचान करना जीवन का लक्ष्य बनना चाहिए। जीवन में सत्संग, प्रवचन को विशेष महत्व दे परमात्मा में लीन रहना चाहिए और परमात्मा के प्रति आत्मिक श्रद्धा रखनी चाहिए।
किसी को भगवान की वाणी पर श्रद्धा हो तो वह संसार के सभी मोह से सहज मुक्त हो सकता है। इस अवसर पर मुनि के साथ उनके शिष्य अभिषेक मुनि, अभिनंदन मुनि और अमृत मुनि भी पाट पर विराजमान रहे।