कुरुक्षेत्र। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सरवप्रीत कौर की अदालत ने धारा 182 आईपीसी के तहत दुष्कर्म की झूठी शिकायत दर्ज कराने की महिला आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। मामले का कलंदरा संबंधित अधिकारी ने तैयार न कर दूसरे पुलिस कर्मी ने तैयार किया था। इसी आधार पर अदालत ने महिला को बरी कर दिया।
महिला ने 2019 में तारलोक सिंह और मेजर सिंह पर घर में घुसकर दुष्कर्म का प्रयास करने और कपड़े फाडऩे का आरोप लगाते हुए एसपी को शिकायत भेजी थी। इस पर मामला दर्ज कर जांच की गई तो जांच में आरोप झूठे पाए गए और केस रद्द कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ धारा 182 आईपीसी का कलंदरा तैयार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
जांच अधिकारी ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स या गवाहों के बयान भी अदालत में नहीं पेश किए। मूल शिकायत एसपी को भेजी गई थी, लेकिन कलंदरा थाना प्रभारी द्वारा अदालत में पेश किया गया।
मजिस्ट्रेट सरवप्रीत कौर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 195 सीआरपीसी के अनुसार कलंदरा केवल संबंधित लोक सेवक (एसपी) या उनसे उच्च अधिकारी द्वारा ही पेश किया जा सकता है।
प्रभारी न तो संबंधित लोक सेवक है और न ही उनसे उच्च अधिकारी। इसलिए कलंदरा कानूनी रूप से बनाए रखने योग्य नहीं था। अदालत ने आरोपी महिला को बरी करते हुए उसके जमानती बांड निरस्त कर दिए। आरोपी को धारा 437-ए सीआरपीसी के तहत 50 हजार रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करने के निर्देश दिए गए।