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Panipat News: 18 साल से बाल स्वरूप कान्हा की सेवा कर रहीं गरिमा

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बाल स्वरूप कान्हा। स्रोत : स्वयं
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मेरा बचपन से धार्मिक कार्यक्रमों में ज्यादा रुझान रहा है। शादी से पहले मेरी मां 2007 में वृंदावन से बाल स्वरूप कान्हा लेकर आई थीं। उस समय मैं पढ़ती थी। बाल स्वरूप कान्हा घर आने से घर का माहौल ही बदल गया था। मां ने कान्हा को मंदिर में स्थान दिया है। तब से मैं अपनी मां के साथ कान्हा की सेवा कर रही हूं। 2018 में मेरी शादी हुई। तब मेरे परिवार वालों ने बाल स्वरूप कान्हा को तोहफे के रूप में दे दिया। क्योंकि कान्हा के बिना मेरा मन नहीं लगता था। शादी के बाद पहले थोड़ा असमंजस में थी कि कहीं ससुराल वाले कान्हा को न अपनाएं लेकिन सभी ने खुशी से कान्हा को अपने मंंदिर में स्थान दिया। शादी के लगभग नौ साल बाद भी कान्हा मेरे मंदिर में विराजमान हैं। ऐसा लगता है जैसे कि वह हर पल मेरे हर काम में साथ दे रहे हैं।
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मैं कान्हा का जन्मदिन जन्माष्टमी पर ही मनाती हूं। जन्माष्टमी पर उनके लिए विशेष भोग बनाया जाता है। दिन में तीन समय कान्हा को भोजन करवाती हूं। सुबह व दोपहर बाद बिस्किट के साथ चाय या दूध का भोग लगाती हूं। अपने समयानुसार व श्रद्धानुसार कान्हा की देखभाल करती हूं। मेरी एक बेटी है। मैं कान्हा का भी अपनी बेटी की तरह जन्मदिन मनाती हूं। कान्हा के लिए नए कपड़े, लहसुन-प्याज रहित भोजन, सर्दी-गर्मी के अनुसार कपड़े आदि का ध्यान रखती हूं। कान्हा के घर में होने से सकारात्मकता रहती है।
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प्रस्तुति : गरिमा मल्होत्रा, मॉडल टाउन
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