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Panipat News: आज घरों में विराजेंगे गणपति बप्पा, श्रद्धालुओं ने की तैयारी

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सेक्टर 25 मित्तल मेगा मॉल के सामने गणेश की प्रतिमा की खरीदारी करती महिला। संवाद
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पानीपत। औद्योगिक नगरी गजानन के स्वागत के लिए घरों से लेकर मंदिरों तक विशेष आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। रविवार सुबह लेकर शाम तक लोगों ने गणपति की प्रतिमा खरीदी। इसके साथ ही स्थापित करने के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई। घरों में गणपति की स्थापित करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा।
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जानकारी के अनुसार सोमवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा और घरों में मूर्ति स्थापित की जाएगी। गणेश भगवान की मूर्ति को लेकर सेक्टर-25 में विशेष रूप से दुकानें सजाई गई। जहां पर चूने, मिट्टी के गणपति छोटे से लेकर आठ से 10 फीट तक के हैं। सजावट के लिए बाजार में ग्रीन तोरण, मोगरा तोरण, गुलाब तोरण, गेंदा तोरण, गुलाब मेट, घास मेट, गेंदा रिंग, गुलाब हार, मोती हार व आर्टिफिशियल बेल के साथ कई तरह के फूलों के तोरण तैयार हैं। इनकी कीमत 100 से पांच सौ रुपये तक है। वहीं घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित करने के लिए मिठाई की दुकानों पर भी रविवार को चहल-पहल नजर आई। दुकानों पर मोतीचूर और मावे के मोदक की बिक्री हुई।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर इस बार विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आगमन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के अत्यंत दुर्लभ व शुभ संयोग में होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में गणपति की स्थापना और पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी अटके कार्य सिद्ध होते हैं। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से प्रारंभ होगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल से जुड़ा होने के कारण मध्याह्न व्यापिनी तिथि में ही गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। विघ्नहर्ता की स्थापना करने से श्रद्धालुओं के सभी कष्ट दूर होते हैं। भक्तजन मध्याह्न मुहूर्त में पूरी श्रद्धा के साथ गणपति की स्थापना कर पूजन करें।
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मुहूर्त 11:02 बजे
14 सितंबर को गणेश स्थापना और मध्याह्न पूजा का महा मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 29 मिनट है। इसके अतिरिक्त सुबह 6:05 से 7:38 बजे तक अमृत चौघड़िया और सुबह 9:10 से 10:43 बजे तक शुभ चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकता है।
ऐसे करें स्थापित
गणेश प्रतिमा को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद वस्त्र, मौली, चंदन, अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। अंत में मंत्र जाप, गणेश चालीसा का पाठ और आरती कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। पूजा के लिए प्रतिमा, कलश, नारियल, रोली, अक्षत, दूर्वा, धूप-दीप, पंचामृत, फल, मोदक, पान-सुपारी आदि का प्रयोग करें।
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