कथा सुनाते राधे-राधे महाराज। स्रोत : सोशल मीडिया
- सेक्टर 13-17 स्थित वृंदा एनक्लेव परिवार की ओर से श्रीमद्भागवत कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। सेक्टर 13-17 स्थित वृंदा एनक्लेव परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को सातवां दिन रहा। कथावाचक राधे राधे महाराज ने कहा कि ईश्वर की भक्ति, संत-सद्गुरु के प्रभाव से प्रारब्ध की तीक्ष्णता को कम किया जा सकता है। प्राचीन काल में जो लीला का स्वरूप था वो सार्वजनिक नहीं था। अनाधिकारी व्यक्ति उसका आस्वादन नहीं कर सकता था। आज तो सब देके लेके कहीं भी कृष्ण नाच रहें हैं सब नाच रहे हैं और फिर जिसकी जैसी मर्जी वैसे नाच रहे हैं।
ये विचित्र बात है। मानो वो जीव है पर कृष्ण के स्वरूप में बड़ी सामर्थ्य है। उस स्वरूप में ही सामर्थ्य है। बड़ी मर्यादा के साथ पहले लीला का स्वरूप होता था। नौटंकी का नाम लीला नहीं होती मनोरंजन का नाम लीला नहीं होती। साधना की अपनी स्वतंत्रता है और वो अनवरत है। अखण्ड है। साध्य की प्राप्ति के बाद भी साधना अवस्थित रहती है और विकसित होती है और स्थापित हो जाती है। भोग तब तक ही नहीं लगाया जाता जब तक ठाकुरजी न खाए जिस दिन तुम्हारी लगी हुई थाली से उठा लिया उससे पहले लगाते थे अब खिलाओगे।
राम कथा को बनाएं जीवन का आधार : शिव नरेश शास्त्री
पानीपत। सेक्टर-25 स्थित रघुनाथ धाम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को कथावाचक पंडित शिव नरेश शास्त्री ने कथा सुनाई। कथा के बाद मंदिर की महिला मंडली ने संकीर्तन किया। कथावाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा और श्रीराम कथा श्राद्ध पक्ष में श्रवण करने से लाभ होता है। इससे पितरों को शांति और प्रभु के चरणों में स्थान मिलता है। जीवन में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। भगवान राम कथा को जीवन का आधार बनाकर जीवनयापन करने से व्यक्ति को प्रभु के चरणों में स्थान मिल जाता है और प्रभु की कृपा से जीवन सुखमय व्यतीत होता है। कथा के बाद मंदिर की महिला संकीर्तन मंडल ने संकीर्तन भी किया। समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। संवाद
कथा सुनाते राधे-राधे महाराज। स्रोत : सोशल मीडिया