परिवार में सुख शांति के लिए गई थी सावित्री
सावित्री(42) पत्नी रोहताश परिवार में सुख शांति के लिए धाम पर गई थी। वो पिछले साल भी धाम पर गई थी। सावित्री का बड़ा बेटा आकाश जेल में है। रवि व बेटी नीरू की शादी हो चुकी है।
निर्दोष ने गंवाई दोनों पैर
गांव उझा का निर्दोष पिछले साल भी मत्था टेकने धाम पर गया था। इस बार भी वो जत्थे के साथ धाम पर गया था। ट्राली के नीचे दबने से उसकी दोनों पैर कट गए। एक हाथ टूट गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिजन उसे चंडीगढ़ पीजीआई लेकर गए हैं।
मां ने बेटी खोई, खुद भी मौत से लड़ रही जंग
गांव उझा की पिंकी अपनी बड़ी बेटी चानू (14) और छोटी बेटी पायल को साथ लेकर धाम पर गई थी। पिता जगपाल ने तीनों को तैयार कराकर ट्राली में बैठाया था। जगपाल को शुक्रवार सुबह ड्यूटी पर जाना था। इसलिए वह रात 11 बजे सो गया। पिंकी ने चारु व पायल को गोद में बैठाया था। ट्राली के पलटते ही तीनों नीचे दब गए। पिंकी व चानू गंभीर रूप से घायल गई। पायल को भी सिर में चोटें आई। चानू ने हादसे के लगभग छह घंटे के बाद सवा 11 बजे दम तोड़ दिया। पिंकी की हालत गंभीर बनी हुई है। पिंकी व पायल को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया है।
हादसा देखकर रूह कांप उठ रही थी
उझा गांव के सुनील कुमार ने अमर उजाला को बताया कि हादसे का दृश्य रूह कंपा देने वाला था। मैं भी ग्रामीणों के साथ चुलकाना धाम पर मत्था टेकने गया था। ट्रैक्टर ट्राली का हुक खराब हो गया। चालक बिरजू ने ट्रैक्टर को एक तरफ खड़ा कर लिया। मैं भी ट्राली से नीचे उतरकर देखने लगा। हुक को पांच मिनट में ठीक कर दिया गया। वे दोनों ट्राली में बैठ रहे थे। इसी वक्त पीछे से आए एक ट्रक ने ट्राली को तेज गति में टक्कर मार दी। ट्राली दूर जाकर गिरी और पलट गई।
सभी लोग ट्राली के नीचे दब गए। उनकी चीख पुकार मच गई। वे ट्राली के नीचे दबे चिल्ला रहे थे। उन्होंने मदद के लिए वाहनों को रुकवाया और उनकी मदद से ट्राली को सीधा किया।कई महिलाओं के अंग कट गए थे। पूरी सड़क पर मांस के लोथड़े बिखरे पड़े थे। उन्होंने फोन कर गांव में हादसे के बारे में बताया। गांव से सैकड़ों लोग हादसा स्थल पर पहुंच गए। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।