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Panipat News: जिप की पूर्व अध्यक्ष काजल को अग्रिम जमानत, जांच में शामिल होने के आदेश

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काजल देशवाल।
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- काजल देशवाल की सदस्यता पर एसीएस ने भी की सुनवाई, फैसला सुरक्षित रखा

माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल को जालसाजी के मामले में एडीजे योगेश चौधरी की कोर्ट में बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने काजल देशवाल की अग्रिम जमानत मंजूर कर दी है। कोर्ट ने साथ ही काजल को पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पंचायत विभाग के एसीएस साकेत कुमार ने उनकी सदस्यता रद्द करने के आदेश पर पुनर्विचार करते हुए सुनवाई की। उन्होंने इसमें अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब एसीएस के फैसले पर सबकी नजर है।
एडीजे योगेश चौधरी की कोर्ट ने मंगलवार को काजल देशवाल की अग्रिम जमानत पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील को सही मानते हुए उनकी अग्रिम जमानत को मंजूर कर दिया। पंचायत विभाग के एसीएस साकेत कुमार ने मंगलवार को दोनों पक्षों को सुना। शिकायतकर्ता प्रदीप शर्मा ने काजल देशवाल पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ने के सबूत दिखाए। इसके साथ ही एडीसी और पंचायत विभाग के निदेशक के फैसले की रिपोर्ट रखी।
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वहीं काजल देशवाल की तरफ से उनके वकील ने पूरे मामले को रखा। एसीएस के सामने करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। एसीएस ने दोनों पक्षों को सुनकर किसी प्रकार का फैसला नहीं दिया। काजल देशवाल ने बताया कि उन पर षडयंत्र के तहत आरोप लगाए हैं। थाना शहर में दर्ज केस भी इसी का हिस्सा है। वे इस मामले का जल्द खुलासा करेंगी। वहीं शिकायतकर्ता प्रदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस मामले में अपनी शिकायत दी थी। अधिकारियों की जांच में आरोप सही पाए गए हैं। इन्हीं के आधार पर काजल देशवाल की सदस्यता रद्द की है और पुलिस ने इसी के आधार पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है।
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जालसाजी का मुकदमा किया था दर्ज
जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष ज्योति शर्मा के पति प्रदीप शर्मा ने थाना शहर की पुलिस में शिकायत देकर पूर्व अध्यक्ष काजल पर फर्जी तरीके से जाति प्रमाणपत्र बनवाने और इसके आधार पर आरक्षित वार्ड-13 से जिला परिषद के सदस्य का चुनाव लड़ने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने इसमें आईपीसी की 420, 467,468 और 471 धारा में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने इसमें अब तक काजल की गिरफ्तारी नहीं की थी। आरोप है कि काजल देशवाल सामान्य वर्ग से संंबंध रखती हैं, जबकि उन्होंने कहार जाति के फर्जी बीसी प्रमाणपत्र पर नामांकन किया था। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की। एडीसी ने उनका बीसी-ए जाति का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया था। पंचायत विभाग के निदेशक ने 27 जून को काजल देशवाल की सदस्यता रद्द कर दी थी।
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