पानीपत/सनौली। हथिनी बैराज से दो दिन में छोड़े गए 5.68 लाख क्यूसेक पानी ने पानीपत में दो जगह यमुना के बांध को तोड़ दिए। मंगलवार को 2.58 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे यमुना ने विकराल रूप धारण कर लिया। सुबह तामशाबाद गांव के पास बांध टूट गया। प्रशासन ने इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हुए। फिर सुबह नौ बजे नवादा के पास बांध टूट गया। गढ़ी बेसिक, रामड़ा, तामशाबाद, पत्थरगढ़, नवादा आर, नवादा पार गांवों में पांच-पांच फीट पानी भर गया। इससे इन गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया। यहां सैकड़ों परिवार अब भी फंसे हुए हैं। गोयला कलां गांव में अपने पशुओं को बचाने के प्रयास में एक किसान बह गया। उसका अब तक पता नहीं लग पाया है। सनौली कलां गांव स्थित गोशाला पूरी तरह डूब गई। ग्रामीणों ने यहां अपने स्तर पर गोवंशों को बचाने का प्रयास किया। इस दौरान 10 गोवंशों की मौत हो गई। ग्रामीणों ने खुद गहरे पानी में उतरकर 1270 गोवंशों काे बाहर निकाला। मंगलवार देर शाम एनडीआरएफ की तीन टुकड़ियां भी यमुना पर पहुंच गईं। गांवों में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा था। डीसी वीरेंद्र सिंह दहिया व पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने भी यमुना का निरीक्षण किया।
यमुना तटीय गांव रहीमपुर खेड़ी पूरी तरह डूब चुका है। हालांकि प्रशासन ने नाव से 20 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन गांवों में मोबाइल सेवा भी लगभग बंद हो चुकी है। लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। नवादा आर गांव के लोग स्वयं गांव को खाली कर अपना सामान लेकर यहां से निकल रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे स्थिति सामान्य होने पर ही वापस लौटेंगे।
यमुना तटीय 13 गांवों के सैकड़ों किसानों की 30 हजार एकड़ फसल तबाह हो चुकी है। किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है। इससे किसान सदमे में हैं। प्रशासन बर्बाद फसल का आकलन कर रहा है। इससे पहले 2013 में भी इस स्थान पर बांध टूटा था। उस वक्त भी यमुना का विकराल रूप देखने को मिला था।
हथिनीकुंड बैराज से सोमवार को यमुना में 2.58 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से बाढ़ की चिंता बढ़ गई है। मंगलवार सुबह यमुना का जलस्तर 232 मीटर रिकॉर्ड दर्ज किया गया। चेतावनी बिंदु 210 मीटर व खतरे का निशान 231.500 मीटर है। यमुना में फिलहाल चार लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। स्थिति आने वाले दो-तीन दिनों तक चिंताजनक बनी रहने की आशंका है। यमुना खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
1978 में पहाड़ों में तेज बारिश के असर से यहां यमुना के दोनों बांध टूट गए थे। 10 किलोमीटर दूर तक यमुना के दायरे में आने वाले गांव डूब गए थे। इसके बाद प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। 2013 में फिर नवादा गांव के पास बांध टूट गए थे। पूरे क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि जून व ज्येष्ठ माह के दशहरे के पास जितना पानी 2013 में यमुना में आया है, आजादी के बाद इतना पानी कभी नहीं आया था। तीन सितंबर 1978 को सात लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया था। एक दिन में 17 जून 2013 को 8.06 लाख क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया था।
गोयला कलां गांव में यमुना के पानी में डूब रही भैंस को बचाने कूदा किसान विक्रम (47) पुत्र जनारा बह गया। जानकारी के अनुसार किसान अपनी भैंस को बचाने के लिए पानी में चला गया और तेज पानी के बहाव में बहता चला गया।
सांसद संजय भाटिया ने यमुना के हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की नजर पूरे हालात पर है। जहां से तटबंध टूटा है, उसे ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सनौली गोशाला से गोवंशों को सुरक्षित निकालकर दूसरी गोशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। किसी आपात स्थिति में उन्हें सूचना दे सकते हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों को मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।