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आतिशबाजी : बच्चे और दमा के मरीज बरतें सावधानी

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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। दिवाली के पर्व पर होने वाली आतिशबाजी से दमा के मरीज की परेशानी बढ़ जाती है, वहीं आतिशबाजी करते समय अभिभावक बच्चों को अकेला न छोड़ें। उनकी आंख व कान की सुरक्षा का इंतजाम करके ही उन्हें आतिशबाजी करने दें। चिकित्सकों के अनुसार आतिशबाजी से आंख, कान, त्वचा और सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केतन भारद्वाज ने बताया कि दिवाली पर साफ-सफाई और आतिशबाजी के कणों के कारण व धुएं से आंखों की ओपीडी बढ़ जाती है। आतिशबाजी के धुएं में मौजूद रसायन आंखों में जलन और एलर्जी का कारण बन सकते हैं इसलिए आतिशबाजी करते समय सुरक्षात्मक चश्मा पहनना चाहिए।
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ईएनटी (कान, नाक और गला) विशेषज्ञ डॉ. अंकुर खन्ना ने बताया कि पटाखों व विभिन्न प्रकार की आतिशबाजी से होने वाले तेज आवाज कानों में गंभीर प्रभाव डालती है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक तेज आवाज सुनने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
सांस के मरीज मास्क लगाकर ही बाहर निकलें

टीबी उन्मूलन के नोडल अधिकारी डॉ. लाभ सिंह ने बताया कि आतिशबाजी का धुआं सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को घर से बाहर जाने से बचना चाहिए और ज्यादा जरूरी है तो मुंह पर मास्क लगाकर घर से बाहर निकलें।
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अस्पताल में सोमवार को भी ओपीडी बंद रहेगी लेकिन इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त स्टाफ की ड्यूटी लगाई है। लोगों को दिवाली पर कुछ सावधानियां बरतकर आतिशबाजी करनी चाहिए।
- डॉ. विजय मलिक, सीएमओ पानीपत
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