आरोप है कि कमरे के बाहर ही आरोपी चचेरा भाई और उसका दोस्त पिस्तौल व कुल्हाड़ी लेकर पहरा दे रहे थे, लेकिन गांव के ही सचिन व एक अन्य युवक ने हिम्मत दिखाई और आरोपियों को दबोचने का प्रयास किया तो वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद ग्रामीणों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण सचिन ने बताया कि मंगलवार को वे गांव में घर पर ही था। तभी राखी का फोन आया कि चाचा मोनू ने सभी को कमरे में बंद कर आग लगा दी है। इसके बाद वो बचाव के लिए बाहर आया तो देखा कि आरोपी मोनू पिस्तौल लेकर घर के बाहर खड़ा था। वहीं उसके साथ राहुल के हाथ में कुल्हाड़ी थी।
ऐसे में कोई भी ग्रामीण आग को बुझाने और परिजनों को बचाने की साहस नहीं कर पा रहा था। कारण कि जब भी कोई बचाने के लिए आगे बढ़ता तो दोनों आरोपी हमलावर हो जाते। वहीं अंदर से लगातार चीखने की आवाज आ रही थी। इसके बाद वो गांव के एक अन्य युवक संग बचाव में आगे बढ़ा।
इस दौरान उसके पिता भी साथ थे। उन्होंने हिम्मत दिखाकर आरोपियों को दबोचने का प्रयास किया तो वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद ग्रामीणों ने कमरे का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो तीन साल के चिराग की मौत हो चुकी थी, जबकि अन्य पांच लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।
हालत गंभीर होने पर राखी को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया, जहां वो जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपियों ने पहले छप्पर में आग लगाई, फिर कमरे में डीजल छिड़क आग लगा दी, ताकि कोई अंदर न जा सके, लेकिन राखी ने तत्परता दिखाते हुए सचिन को फोन कर दिया, जिससे मौके पर ग्रामीण जमा हो गए। बताया जा रहा है कि अगर थोड़ी और देर होती तो सभी छह लोगों की जान जा सकती थी।
रहम की भीख मांगते रहे परिजन पर चचेरे भाई पर था खून सवार
ग्रामीणों के अनुसार, घर में पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने के बाद आरोपी मोनू और उसका दोस्त राहुल बाहर पहरा देते रहे, जबकि अंदर से चचेरे भाई के परिजन चीख पुकार के साथ रहम की गुहार लगाते रहे, लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। मानों आरोपियों के सिर पर खून सवार था। करीब एक घंटे तक आरोपी मौके पर डटे रहे।